एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। गव्य विकास निदेशक की सामंती कार्यशैली झारखंड सरकार की किसान हितैषी छवि को बदनाम कर रही है। कृषि मंत्री तत्काल कार्रवाई करें। क्योंकि, राज्य के किसानों और आमजनों को अधिकारी से मिलने के लिए कृपा का इंतजार कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने गव्य विकास निदेशालय के निदेशक द्वारा बीते 8 अक्टूबर को जारी पत्र में आगंतुकों के लिए कथित रूप से लागू की गई ऐसी व्यवस्था पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, जिसमें पहले आगंतुक रजिस्टर में नाम, पता और विभाग में आने का उद्देश्य दर्ज कराने तथा उसके बाद संबंधित अधिकारी द्वारा मिलने की इच्छा व्यक्त किए जाने पर ही मुलाकात की बात सामने आई है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि गव्य विकास निदेशालय कोई सामंती दरबार नहीं, बल्कि राज्य के किसानों, पशुपालकों, मजदूरों और आम जनों की सेवा के लिए नियत सरकारी संस्थान है। उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान को अपनी समस्या लेकर सरकारी अधिकारी से मिलने के लिए पहले यह साबित करना पड़े कि वह अधिकारी से मिलने के योग्य है, तो यह व्यवस्था जनसेवा नहीं बल्कि अफसरशाही और सामंती मानसिकता का प्रतीक है।
नायक ने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन में किसान एवं पशुपालक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनसे संवाद करने के बजाय उन्हें अधिकारी के दरवाजे पर इंतजार करवाना सरकार की किसान हितैषी नीतियों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड सरकार आम जनों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करने और किसानों के हित में काम करने का दावा करती है। यदि सरकार के ही किसी निदेशालय में अधिकारी आम रहिवासियों से मिलने को अपनी इच्छा पर निर्भर बना दे।
इससे पूरी झारखंड सरकार की छवि खराब होती है और विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की से मांग की कि वे इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लें और गव्य विकास निदेशक डॉ संजीव कुमार की कार्यशैली की उच्च स्तरीय जांच कराएं। यदि आगंतुकों के साथ ऐसी व्यवस्था लागू करने का आदेश वास्तव में जारी किया गया है, तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए और जन संवाद में असंवेदनशीलता बरतने वाले अधिकारी को अविलंब पद से हटाया जाए।
नायक ने कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। किसान को अपनी समस्या बताने के लिए किसी अधिकारी की कृपा का इंतजार करना पड़े, यह झारखंड जैसे लोकतांत्रिक राज्य में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या राज्य के अन्य निदेशालयों में भी ऐसी व्यवस्था लागू है? यदि नहीं, तो गव्य विकास निदेशालय में ऐसी व्यवस्था क्यों बनाई गई और किसके आदेश से बनाई गई?
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कृषि मंत्री से मांग की कि कथित आगंतुक रजिस्टर व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे जनहित के अनुरूप बनाया जाए। किसान, पशुपालक और आम जनों से मिलने के लिए पारदर्शी एवं सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। यदि आदेश निदेशक स्तर से जारी किया गया है, तो उसकी वैधानिकता और प्रशासनिक औचित्य की जांच की जाए। तथा जनता के साथ दुर्व्यवहार अथवा जनसंपर्क से बचने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
नायक ने कहा कि झारखंड में सरकार आमजनों के दरवाजे तक पहुंचने की बात करे और अधिकारी अपने दरवाजे तक पहुंचने से पहले रजिस्टर और अनुमति की दीवार खड़ी करे। यह दोहरा रवैया झारखंड में नहीं चल सकता है।
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