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सरकार की वादाखिलाफ़ी के विरोध में पटना में राजस्व कर्मियों का धरना-प्रदर्शन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने सरकार पर लिखित समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। लंबित मांगो और बेहाल कर्मचारियों की हालत को देखते हुए 10 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में राजस्व कर्मियों द्वारा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना-प्रदर्शन के पहले दिन सैकड़ो की संख्या में राजस्व शामिल होकर अपनी चट्टानी एकता का प्रदर्शन किया।

उक्त जानकारी देते हुए प्रसिद्ध रंगाकर्मी मनीष महीवाल ने बताया कि बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारियों की लंबित मांगों, विभागीय वादाखिलाफी और अमानवीय कार्य दबाव के विरोध में पटना में धरना-प्रदर्शन किया गया।

कहा कि वर्ष 2025 में बिहार के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के साथ संघ की वार्ता में लिखित सहमति बनी थी। इसके बाद वर्ष 2026 में 90 दिनों तक चली हड़ताल के उपरांत विभागीय सचिव जय सिंह के साथ भी लिखित सहमति बनी। लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब विभाग के सर्वोच्च पदाधिकारियों के लिखित आश्वासन का ही सम्मान नहीं होगा, तो कर्मचारी न्याय के लिए आखिर कहां जाएं?

संघ द्वारा कहा गया कि आज भी ग्रेड पे, गृह जिला स्थानांतरण, सेवा संपुष्टि एवं एसीपी का लाभ वर्षों से लंबित है। कर्मचारियों को सरकारी कार्य के लिए पेन, पेपर, प्रिंटर, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन, ईंधन, कुर्सी, टेबल, पंखा और अलमारी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद एक कर्मचारी पर तीन-तीन, चार-चार हलकों का अतिरिक्त बोझ डालकर समयबद्ध और शत-प्रतिशत त्रुटिरहित कार्य की अपेक्षा की जा रही है।

कहा गया कि निर्धारित कार्यालय अवधि का उल्लंघन, सुबह से देर रात तक काम, रविवार एवं राजपत्रित अवकाशो में कार्य और उसके बदले क्षतिपूर्ति अवकाश का अभाव अब सामान्य व्यवस्था बना दिया गया है। एक साथ कई अभियान चलाकर अव्यावहारिक समय-सीमा तय करना कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ाता है। सचिवालय के लिपिक संवर्ग में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, जबकि 15 वर्षों से सेवा दे रहे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारी पदोन्नति और उचित वेतन लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिला स्तर पर विभागीय निर्देशों के बावजूद सेवा संपुष्टि एवं एसीपी के मामलों का लंबित रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

कहा गया कि सर्वे की विफलता पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वर्षों से चल रहे भूमि सर्वेक्षण पर अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने और रैयतों की परेशानी बने रहने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। सर्वेक्षण के लिए अलग टीम एवं अलग व्यवस्था है। ऐसे में सर्वे की कमियों का ठीकरा उन राजस्व कर्मचारियों पर फोड़ना, जिनका सर्वेक्षण कार्य से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, सरकार द्वारा वास्तविक जवाबदेही से बचने का प्रयास है।

कहा गया कि संघ स्पष्ट करना चाहता है कि कर्मचारी जनता की सेवा से पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि बिना संसाधन, बिना पदोन्नति और बिना सम्मान के केवल दबाव के बल पर प्रशासन चलाने की नीति का विरोध कर रहे हैं। रैयतों की परेशानी दूर करने के लिए कर्मचारियों को दोषी ठहराने के बजाय विभाग को अपनी व्यवस्था, संसाधनों और जवाबदेही की समीक्षा करनी चाहिए। संघ की मांग है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारियों को पूर्व में बनी दोनों लिखित सहमतियों को लागू किया जाए। सभी लंबित सेवा संबंधी मांगों का समयबद्ध निष्पादन हो। गृह जिला स्थानांतरण एवं ग्रेड पे का लाभ दिया जाए। पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तथा कार्यावधि और अवकाश संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

संघ स्पष्ट करना चाहता है कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। यदि विभाग ने कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को और व्यापक एवं निर्णायक बनाने के लिए संघ लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा।

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