गरीब की बेटी के जन्मजात हृदय रोग का केरल में प्रशासनिक पहल से ऑपरेशन
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के रेहवाघाट ढोरी वस्ती रहिवासी 15 वर्षीया खुशी कुमारी के लिए बोकारो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित पहल जीवन में नई उम्मीद लेकर आई। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली खुशी के हृदय में जन्मजात छिद्र था। उसके पिता अनिल कुमार मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेटी का महंगा इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था।
मामला संज्ञान में आने के बाद बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने तत्काल पहल करते हुए सिविल सर्जन बोकारो डॉ अभय भूषण प्रसाद एवं फुसरो नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी राजीव रंजन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने खुशी के इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सा रिपोर्ट एवं जांच की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापित डीईआईसी मैनेजर मो. वसीम ने खुशी के परिवार से समन्वय स्थापित करते हुए तत्काल आवश्यक मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई। इसके बाद केरल स्थित अमृता हॉस्पिटल कोच्चि के चिकित्सकों से संपर्क कर बच्ची की बीमारी एवं संभावित उपचार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। चिकित्सकों ने आवश्यक जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी।
जिला प्रशासन की लगातार समन्वय और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद बीते 20 अगस्त को खुशी को अमृता हॉस्पिटल कोच्चि में भर्ती कराया गया। ऑपरेशन से पूर्व आवश्यक सभी जांच पूरी की गईं और 21 अगस्त को जन्मजात हृदय रोग के उपचार के लिए सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद जांच रिपोर्ट सामान्य पाए जाने पर खुशी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह अपने परिजनों के साथ सकुशल घर लौट आई है।
खुशी के पिता अनिल ने झारखंड सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद प्रशासन ने उनकी बेटी के इलाज के लिए तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा, सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद एवं स्वास्थ्य विभाग के डीईआईसी मैनेजर मो. वसीम के प्रति विशेष आभार जताया।
डीईआईसी मैनेजर वसीम ने 29 अगस्त को बताया कि इसी पहल के तहत लगभग 8 बच्चों को अमृता हॉस्पिटल कोच्चि भेजा गया है, जिनमें ऑपरेशन हो चुके बच्चे पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के लिए अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग बोकारो की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ध्यान देने योग्य है कि खुशी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और संबंधित संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। समय पर पहल और उपचार से खुशी को न केवल सफल चिकित्सा मिली, बल्कि उसके परिवार के जीवन में भी नई उम्मीद जगी है।
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