एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। नीति आयोग की रिइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत @2047 रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2021 में 15 से 29 वर्ष की उम्र के लगभग 8.7 करोड़ युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण किसी से भी नहीं जुड़े थे। यह आंकड़ा देश के युवाओं के सामने खड़े गंभीर रोजगार और शिक्षा संकट को उजागर करता है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 22 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कहा कि सरकार युवाओं की संख्या को स्किल करने के आंकड़ों से अपनी उपलब्धि बता रही है, लेकिन असल सवाल है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार कितना मिला। कहा कि यदि करोड़ों युवा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण से बाहर हैं, तो केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बजट की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा।
एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में यह तथ्य बेहद चिंताजनक है कि सिर्फ 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट्स ही अपनी क्वालिफिकेशन के अनुरूप रोजगार में हैं। इससे स्पष्ट है कि देश की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार बाजार के बीच गंभीर डिसकनेक्ट है। डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को कम वेतन वाली नौकरियां स्वीकार करने या बेरोजगारी का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
एहतेशाम ने कहा कि क्लास 6 से स्किल और एंटरप्रेनियरशिप एजुकेशन शुरू करने का प्रस्ताव स्वागत योग्य है, लेकिन इसे केवल पाठ्यक्रम में जोड़ देना पर्याप्त नहीं है। कहा कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक लेबरेटरीज, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, इंडस्ट्री एक्सपोजर और पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कहा कि गरीब छात्रों को वोकेशनल एजुकेशन के नाम पर सस्ती या कम गुणवत्ता वाली शिक्षा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपरेंटिसशिप और अर्न-व्हाईल-यू-लर्न प्रोग्राम्स को बढ़ावा देने की जरूरत है, लेकिन इन योजनाओं में छात्रों के अधिकार, उचित स्टाइपेंड, जॉब सिक्योरिटी और एक्सप्लॉइटेशन से सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।एमएसएमआई को इंसेंटिव्स देने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अपरेंटिसशिप को सस्ते श्रम के विकल्प के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।
एहतेशाम ने कहा कि एआईएसएफ सरकार से मांग करती है कि युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार पैदा करने की ठोस नीति बनाई जाए। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में मुफ्त वोकेशनल और स्किल एजुकेशन की व्यवस्था हो। हायर एजुकेशन को केवल डिग्री देने वाली व्यवस्था के बजाय क्वालिटी एजुकेशन, प्रैक्टिकल एक्सपोजर और रोजगार से जोड़ने वाली व्यवस्था बनाया जाए। सरकार हर साल ट्रेनिंग के आंकड़े जारी करने के साथ यह भी बताए कि ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले कितने युवाओं को स्थायी रोजगार या स्वरोजगार मिला।
एहतेशाम परवीन ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं को केवल स्किल नहीं, बल्कि शिक्षा का अधिकार, रोजगार का अवसर और सम्मानजनक भविष्य चाहिए। सरकार को आंकड़ों की राजनीति छोड़कर शिक्षा और रोजगार के बीच वास्तविक पुल बनाना होगा। अन्यथा विकसित भारत का सपना युवाओं की बेरोजगारी और असुरक्षित रोजगार की हकीकत के सामने खोखला साबित होगा।
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