SC ने ठोंका मनपा पर पांच लाख का दंड, आयुक्त और निजी स्टाफ वेतन रोकने का आदेश
विशेष संवाददाता/मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (मनपा) की आयुक्त अश्विनी भिड़े को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बोरीवली पूर्व में BEST बस स्टेशन के लिए आरक्षित जमीन से अवैध कब्जे नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आयुक्त को अवमानना का नोटिस जारी किया है। अदालत ने नवंबर महीने का उनका वेतन और उनके निजी स्टाफ का वेतन रोकने का भी आदेश दिया है। इसके साथ ही मनपा पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने यह आदेश दिया। अदालत ने मनपा की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आयुक्त से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
3,400 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे का मामला
यह मामला बोरीवली पूर्व में BEST बस स्टेशन और उससे जुड़ी सुविधाओं के लिए आरक्षित लगभग 3,400 वर्ग मीटर जमीन से संबंधित है। इस जमीन पर मौजूद अतिक्रमण हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले भी निर्देश दे चुका था। 28 जुलाई 2026 को अदालत ने मनपा को तीन महीने के भीतर कब्जे हटाकर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।मनपा ने अदालत में दलील दी कि अतिक्रमणकारियों ने सिविल कोर्ट में मुकदमे दायर किए हैं और दस्तावेज मराठी में होने के कारण उनका अंग्रेजी अनुवाद करने में समय लग रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट से कोई अंतरिम रोक नहीं है तो कार्रवाई में बाधा नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों की मिलीभगत पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने आशंका जताई कि बीएमसी के कुछ अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयुक्त को अपने बचाव में जवाब देना होगा। यह मामला मुंबई महानगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Tegs: #Supreme Court initiates contempt proceedings against Municipal Commissioner
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