एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आवाज दबाने और एफआईआर दर्ज करने से वोट चोरी का सवाल दबने वाला नहीं है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने देश की राजधानी नाई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं इंडी गठबंधन के सांसदों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई और हिरासत की घटना पर 7 अक्टूबर को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरा घटनाक्रम देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां और ज्ञापन रखना चाहते थे। निर्वाचन आयोग की ओर से बैठक के लिए निर्धारित प्रक्रिया का हवाला दिया गया है, जबकि विपक्ष का कहना है कि वह सीधे निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और एसआईआर से जुड़े सवालों पर जवाब चाहता था।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को पुलिस की बैरिकेडिंग, हिरासत या एफआईआर के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि मतदाता सूची, एसआईआर अथवा चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उनका समाधान संवाद, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जनता द्वारा चुने गये देश के निर्वाचित सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनके नेतृत्व में सांसदों का निर्वाचन आयोग तक पहुंचकर अपनी बात रखने का प्रयास लोकतांत्रिक संवाद की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए। कहा कि दिल्ली पुलिस के अनुसार लगभग 260 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
प्रदेश प्रवक्ता नायक ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से देशवासियों के मन में उठ रहे सवाल समाप्त नहीं होंगे। असली मुद्दा यह है कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक, स्पष्ट और पारदर्शी जवाब दिया जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है। मतदाता के अधिकारों की रक्षा करना विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है। राहुल गांधी की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक सवालों को और व्यापक करेगा। कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान, लोकतंत्र और प्रत्येक मतदाता के मताधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में जनता का विश्वास सर्वोपरि है। उस विश्वास को मजबूत करने के लिए पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से मांग की कि विपक्षी सांसदों द्वारा उठाए गए चुनावी प्रक्रिया एवं मतदाता सूची संबंधी सवालों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जवाब दिया जाए तथा लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता मजबूत किया जाए।
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