अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के श्रीगजेन्द्र मोक्ष देव स्थानम दिव्य देश नौलखा मंदिर में 13 सितंबर को अपराह्न बेला में भगवान श्रीवराह प्राकट्य महोत्सव वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने कहा कि यह दिवस श्रीसंप्रदाय के मूल आचार्य श्रीमन्नारायण के तृतीय अवतार, साक्षात यज्ञमूर्ति भगवान वराह का प्राकट्य उत्सव है। उन्होंने कहा कि भगवान का दिव्य विग्रह श्रीसंप्रदाय का परम सिद्धांत है। कहा कि एक हाथ में धर्म रक्षा के लिए गदा और दूसरे हाथ में वात्सल्य स्वरूप पृथ्वी को धारण किए हुए।
वराह तत्व की व्याख्या करते हुए आचार्य लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि विशिष्टाद्वैत सिद्धांत के अनुसार भगवान के पांच स्वरूप हैं। पर, व्यूह, विभव, अंतर्यामी और अर्चा। वराह भगवान विभव अवतार हैं। पुराण कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया, तब भक्त-वत्सल नारायण ने वराह रूप धारण कर उसका उद्धार किया। यह केवल भू-उद्धार नहीं, जीव के उद्धार का प्रतीक है। जैसे पृथ्वी रसातल में डूबी थी, वैसे ही जीव अज्ञान रूपी रसातल में डूबा है, जिसे निकालने स्वयं भगवान आते हैं।
गीता के श्लोक यदा यदा हि धर्मस्य… सम्भवामि युगे युगे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वराह अवतार इसी वचन की प्रत्यक्ष सिद्धि है। जगद्गुरु ने बताया कि वराह स्वरूप दो संदेश देता है। गदा दुष्टों के विनाश द्वारा धर्म की रक्षा का प्रतीक है, जबकि गोद में स्थित पृथ्वी शरणागत वत्सलता का प्रतीक है। जिस प्रकार माता कीचड़ में गिरे शिशु को बिना योग्यता देखे उठा लेती है, उसी प्रकार भगवान ने बिना यज्ञ, योग की अपेक्षा के केवल अपनी निरुपाधिक करुणा से भूदेवी का उद्धार किया। यही श्रीसंप्रदाय का प्राण है।
उन्होंने कहा कि श्रीसंप्रदाय में मान्यता है कि वराह उपासना से भूमि दोष, भय और अस्थिरता समाप्त होती है। इस दिन ॐ वराहाय नमः, ॐ भू-वराहाय नमः मंत्र जप और वराह स्तुति से जीवन में धर्म और सदाचार का प्रकाश होता है। आचार्य लक्ष्मणाचार्य ने बताया कि वराह पुराण में भगवान ने भूदेवी को आश्वासन दिया था कि अंतकाल में स्मरण करने वाले की वे वैसे ही रक्षा करते हैं, जैसे पहरेदार धन की करता है।
महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अहंकार त्याग कर परम पुरुष के श्रीचरणों में प्रपत्ति और पूर्ण आत्मसमर्पण का संकल्प लिया। इस अवसर पर भगवान यज्ञ वाराह बालाजी का सहस्त्रधारा, पद्मधारा, चक्रधाराओं से दिव्य रस रसायनों, पंचामृत दही, दुध, घी, शक्कर से महाभिषेक किया गया। इस अवसर पर दिलीप झा, फूल देवी, भोला सिंह, नंदकिशोर तिवारी सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष श्रद्धालुजन उपस्थित थे।
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