रंजन वर्मा/बोकारो (कसमार)। झारखंड अलग राज्य के निर्माण में अपना योगदान देने वाले सभी आंदोलनकारियों को समान सम्मान और अधिकार दिलाने की मांग अब मुखर होने लगी है। इसी कड़ी में 30 अक्टूबर को बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के सिंहपुर पंचायत भवन में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा कसमार प्रखंड कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिना किसी भेदभाव के सभी झारखंड आंदोलनकारियों को 50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन देने की पुरजोर मांग की। बैठक के दौरान उपस्थित प्रमुख आंदोलनकारियों और वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए सरकार से आंदोलनकारियों के हितों की रक्षा करने की अपील की।
संस्थापक सह प्रधान सचिव महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में जेल जाने वाले और जेल नहीं जाने वाले, दोनों श्रेणियों के आंदोलनकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में जेल जाने की बाध्यता के आधार पर आंदोलनकारियों के बीच अंतर करना उचित नहीं है। सरकार को जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर सभी आंदोलनकारियों को समान सम्मान देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सम्मान पेंशन के लिए जेल जाने की शर्त समाप्त की जाए तथा सभी आंदोलनकारियों को 50 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। इसके अलावा आंदोलनकारियों को अलग पहचान और सम्मान देने के साथ उनके बच्चों के लिए रोजगार तथा सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
मोर्चा के उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने कहा कि राज्य निर्माण के इतने साल बीत जाने के बाद भी आंदोलनकारियों को उनका वास्तविक हक और सम्मान नहीं मिल पाया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के संघर्ष को कमजोर आंकने की भूल नहीं करनी चाहिए। जब तक हर एक वास्तविक आंदोलनकारी को उसका पूरा अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक हमारा यह संघर्ष और आंदोलन पूरी एकजुटता के साथ निरंतर जारी रहेगा।
बैजनाथ महतो ने कहा कि अगर सरकार नहीं मानती है तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। डॉ जीतलाल महतो ने कहा कि राज्य के निर्माण में जिन्होंने अपना पसीना और समय बहाया, आज उन्हें अपने ही हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उमेश कुमार जायसवाल ने कहा कि झारखंड आंदोलन में जेल जाने और न जाने की बात प्रासंगिक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने में हर वर्ग की भूमिका अहम थी। जगरनाथ महतो ने कहा कि राज्य सरकार को आंदोलनकारियों के त्याग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इस अवसर पर आंदोलनकारी काशीनाथ सोरेन, आनंद कुमार महतो, संतोष महतो, राजेश्वर महतो, आलोक पांडेय आदि ने भी संबोधित किया।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि आगामी 15 नवंबर तक (राज्य स्थापना दिवस से पूर्व) सरकार ने इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो उलगुलान : एक क्रांति का आगाज के तहत अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन का जोरदार आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के रामगढ़ जिलाध्यक्ष कार्तिक महथा जबकि स्वागत भाषण बैधनाथ महतो ने दिया। इस अवसर पर वासिद अंसारी, सुरेंद्र महतो, संतोष महतो, रामकिंकर महतो, झरीराम महतो, बुधन करमाली, फागू महतो, आलोक कुमार गोस्वामी, हीरालाल स्वर्णकार, अनवर अंसारी, बिंदेश्वर माझी, रमेश वर्मा, भागीरथ महतो, जय नंदन महतो, अर्जुन महतो, कैलाश महतो, आनंद कुमार महतो सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के अन्य झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
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