एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड राज्य के नवनियुक्त सूचना आयुक्तों को साधुवाद। कांग्रेस की ऐतिहासिक देन सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून-2005 को झारखंड में नई धार मिली है। विशेष सुनवाई शिविर लगाकर लंबित शिकायतवाद एवं द्वितीय अपीलवाद का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उपरोक्त बातें झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 11 जून को कही।
प्रदेश प्रवक्ता नायक ने झारखंड राज्य सूचना आयोग के सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों को साधुवाद देते हुए आशा व्यक्त की है कि उनके नेतृत्व में राज्य में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जनोन्मुखी तरीके से लागू होगा। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार कानून देश में कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा लाया गया एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कानून है, जिसने आम रहिवासियों को शासन-प्रशासन से जवाब मांगने का संवैधानिक अधिकार प्रदान किया। यह कानून लोकतंत्र को मजबूत करने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने तथा सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ है।
नायक ने कहा कि झारखंड राज्य सूचना आयोग में वर्षों से बड़ी संख्या में शिकायतवाद एवं द्वितीय अपीलवाद लंबित पड़े हैं, जिसके कारण आम रहिवासियों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। कहा कि सूचना प्राप्त करने के अधिकार का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब मामलों का त्वरित एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नव नियुक्त सूचना आयुक्तों से आग्रह किया कि वे लंबित मामलों के निष्पादन हेतु विशेष अभियान चलाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष सूचना अदालत अथवा विशेष सुनवाई शिविर आयोजित कर वर्षों से लंबित शिकायतों एवं द्वितीय अपीलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा सुनिश्चित करें। इससे न केवल आम रहिवासियों का आयोग के प्रति विश्वास बढ़ेगा, बल्कि सूचना के अधिकार कानून की प्रभावशीलता भी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि राज्य के दूरदराज क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों, गरीबों, किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों एवं वंचित वर्गों के लिए सूचना का अधिकार एक महत्वपूर्ण हथियार है। इसलिए आयोग को जनहित और पारदर्शिता की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल, सुलभ और समयबद्ध बनाना चाहिए। नायक ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सूचना आयुक्त जन आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए झारखंड में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को और अधिक मजबूत करेंगे तथा लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
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