गायत्री प्रज्ञा पीठ डुमरी में 200 शिक्षकों को किया गया सम्मानित
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला की निकटवर्ती वैशाली जिला के हद में गायत्री प्रज्ञा पीठ डुमरी परिसर में 14 जून को राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा और समाज निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले क्षेत्र के लगभग 200 शिक्षकों को सम्मान-पत्र एवं युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर शिक्षकों ने इसे अपने दायित्वों के प्रति नई प्रेरणा बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व जोन समन्वयक शशि भूषण ठाकुर, उपजोन समन्वयक एस. एन. पांडेय, मधुसूदन पांडेय एवं उपेन्द्र महारथी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत गायत्री मंत्र एवं वैदिक मंगलाचरण के साथ संगोष्ठी की विधिवत शुरुआत की गयी।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक ही समाज और राष्ट्र के वास्तविक निर्माता हैं। वर्तमान समय में बढ़ती सामाजिक चुनौतियों एवं नैतिक मूल्यों में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने शिक्षकों से नई पीढ़ी को संस्कारवान, अनुशासित और राष्ट्रभक्त बनाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने इतिहास के विभिन्न उदाहरणों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब-जब शिक्षक वर्ग सक्रिय और जागरूक रहा है, तब-तब देश और समाज को एक नई दिशा मिली है। आज शिक्षकों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के शिक्षकों के अलावा अनेक शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध रहिवासियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य रूप से शांतिकुंज प्रतिनिधि सच्चिदानंद सिंह, जिला समन्वयक विनोद कुमार, गायत्री प्रज्ञा पीठ के मुख्य ट्रस्टी शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, अशेश्वर शर्मा, गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य ट्रस्टी रामचंद्र सिंह, विश्वनाथ प्रसाद सिंह, बलवंत सिंह, सुरेश साह, महेश्वर प्रसाद सिंह, शीला चौधरी, विमला चौधरी, मालती देवी, आचार्य राजेश तिवारी सहित भारी संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी आगंतुक अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। पूरा कार्यक्रम बेहद सौहार्दपूर्ण और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हो गया।
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