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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर सहयोगिनी ने चलाया जागरूकता अभियान

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे संगठन सहयोगिनी ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मौके 12 जून को प्रशासन के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया।

जिला के हद में सहयोगिनी कार्यालय बहादुरपुर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहयोगिनी के निदेशक गौतम सागर ने कहा कि बोकारो जिले को बाल मजदूरी से भी मुक्त करने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें जिला प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों की ओर से जून माह को बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई माह या एक्शन मंथ के रूप में मनाने के बाबत जारी अधिसूचना व निर्देशों के तहत की गई। इन निर्देशों में बाल मजदूरी की शिकायत वाले इलाकों में छानबीन करने व बच्चों को मुक्त कराने के लिए साझा अभियान चलाने के निर्देश दिए गए है।

इस दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अधिकारीयों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सहयोगिनी बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है।

इस दौरान बोकारो रेलवे स्टेशन में रेलवे सुरक्षा बल के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाया गया। मौके पर कंचन रजवार, उत्तम कुमार राम, सुदीप रजवार, राजा कुमार, राजेश कुमार, मीणा भागवती आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।
जानकारी देते सहयोगिनी के रवि कुमार राय ने बताया कि जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ एक्शन मंथ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नागरिक समाज संगठन इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी नजर रखते हैं।

मौके पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि शोषण व मजदूरी से मुक्त कराए गए तमाम बच्चों के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा व गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। कहा कि बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है। चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपस में गहरे तक जुड़े हैं। हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वह सभी सुविधा मिलें जिसका वह हकदार है।

इस नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत इसका साझा निगरानी तंत्र और आपसी सहयोग है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के देश भर में फैले सहयोगी संगठन एक दूसरे की आंख-कान का काम करते हैं और आपस में सूचनाएं साझा करने के साथ ट्रैफिकिंग के मामलों की निगरानी करते हैं। नेटवर्क के खुफिया सूचना-साझाकरण तंत्र ने देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नतीजे में अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच 1.45 लाख से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया। इनमें अधिकांश मामले ऐसे थे, जिनमें बच्चों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें बाल श्रम करने के लिए मजबूर किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान सहयोगिनी के रवि कुमार राय, अनिल कुमार हेंब्रम, सोनी कुमारी, सूर्यमणि देवी, मंजू देवी, विकास कुमार गोस्वामी, प्रकाश कुमार महतो आदि उपस्थित थे।

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