ऑनलाइन जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन

बंदियो को दी गई ऑनलाइन कानूनी जानकारी
एसपी सक्सेना/ममता सिन्हा,बोकारो। झालसा एवं माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार बोकारो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (Bokaro Pradeep kumar srivastava) के निर्देशानुसार 16 मई को मंडल कारा चास एवं तेनुघाट जेल में जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा व्यवहार न्यायालय बोकारो व् तेनुघाट में आयोजित किया गया।
चास जेल में आयोजित इस जेल अदालत में वादों के निष्पादन हेतु एक बेंच का गठन किया गया था, जिसके सदस्य मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोरंजन कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी संध्या प्रसाद एवं पैनल अधिवक्ता उपस्थित थे। उक्त जानकारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार विश्वनाथ उरांव ने दी। बताया गया कि जेल अदालत में लंबित कुल 3 वादो को सुनवाई हेतु रखा गया, जिसमें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बोकारो के न्यायालय में लंबित एक वाद GR-913/2020, ( B.S. City PS-133/2020 ) u/s 461, 379, 411/34 IPC का निष्पादन किया गया। वाद में कैदी सुनील कुमार उर्फ पोचा को जितने दिन जेल में रहा उतने दिनों की सजा दी गई और उसे जेल से छोड़ने का आदेश दिया गया।
मंडल कारा चास में एक दिवसीय ऑनलाइन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन व्यवहार न्यायालय बोकारो से किया गया, जिसमें वक्ताओं द्वारा चास जेल के कैदियों को कानूनी जानकारी दी गई। जानकारी के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार बोकारो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के निर्देशानुसार 16 मई को तेनुघाट जेल में एक ऑनलाइन जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से किया गया।
तेनुघाट जेल में आयोजित इस ऑनलाइन या आभासी जेल अदालत में वादों के निष्पादन हेतु एक बेंच का गठन किया गया था। जिसके सदस्य एसीजेएम विशाल गौरव एवं एसडीजेएम संजीत कुमार चन्द्र मौजूद थे। उक्त जेल अदालत में वादों के निष्पादन के लिए दो बंदियो द्वारा आवेदन दिया गया था। मगर उन दोनों आवेदन के बंदियों का जेल की अवधि का समय पूरा नहीं होने के कारण उन्हें नहीं छोड़ा जा सका। इस अवसर पर तेनुघाट जेल में एक आभासी या ऑनलाइन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से वीडियो कॉन्फ्रंसिंग के माध्यम से किया गया। इस जागरूकता कार्यक्रम में तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम विशाल गौरव के द्वारा तेनुघाट जेल के बंदियो को जेल अधिनियम के बारे में जानकारियां दी और बंदियों को बताया कि जेल में उन्हें किस प्रकार की सुविधाएं दी जाती है। साथ ही दहेज उत्पीड़न, मोटरयान दुर्घटना के बारे में भी कई जानकारियां देते हुए बताया कि दहेज लेना और देना दोनों कानूनी अपराध है। मौके पर एसडीजेएम संजीत कुमार चंद्र सबसे पहले बंदियों को कोरोना से बचाव के तरीके बताएं। उसके बाद बंदियों को कानूनी जानकारी देते हुए डायन अधिनियम के बारे में बताया बताया कि डायन कहना एक अपराध है। इस मामले में जमानत भी इतनी आसानी से नहीं मिलती है। आगे अधिकार एवं कर्तव्य कि जानकारी देते हुए कहा कि जहां आपका अधिकार है वहीं कर्तव्य भी है। जिस प्रकार रोड पर चलना आपका अधिकार है वहीं रोड के बाएं ओर चलना आपका कर्तव्य है। इसलिए आप अपने अधिकार के साथ साथ कर्तव्यों का भी पालन करते हैं तो आपको कभी भी परेशानी का सामना करना नहीं पड़ेगा। बंदियों को कानूनी जानकारी देते समय जेल अधीक्षक अनिमेष चौधरी, जेलर अरुण कुमार शर्मा आदि मौजूद थे।

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