84% लापता व भगोड़ों को पुलिस ने ढूंढ निकाला
मुश्ताक खान/ मुंबई। आंकड़ो के अनुसार 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2019 तक के गुमशुदा और भागे हुए लोगों की तलाश कर उनकी मंजिल तक पहुंचने में आरसीएफ पुलिस (RCF Police) ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। हालांकि यह आंकड़ा 2018 की तुलना में कम है। करीब 22 किलोमीटर में फैले घनी आबादी वाले इस इलाके में हाल के दिनों में विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावितों को भी सरकारी एजेंसियों द्वारा यहीं पुनर्वास कराया गया है। जिसके कारण आरसीएफ पुलिस स्टेशन की हद में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। जबकि लंबे समय से इस पुलिस स्टेशन में आधिकारियों व कर्मचारियों का अभाव रहा है।
खबर के मुताबिक करीब 22 किलोमीटर में फैला आरसीएफ पुलिस स्टेशन राष्ट्रीय औद्योगिक संस्थानों के कारण आति संवेदनशील माना जाता है। इस इलाके में देश की बहुराष्ट्रीय व नवरत्न एचपीसीएल (HPCL), बीपीसीएल (BPCL), बीएआरसी (BARC), आरसीएफ (RCF) जैसे संस्थान हैं। इसके अलावा टाटा पावर (Tata Power), पेप्सी (Pepsi), एजेस व अन्य कई केमिकल कंपनियां संचालित हैं। इसके बावजूद आरसीएफ पुलिस स्टेशन में बल की भारी कमी होने के बाद भी पुलिसकर्मियों ने लगभग 84 प्रतिशत मामलों को सुलझाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।
यह आंकड़ा 2018 में 96 प्रतिशत था। इस पुलिस स्टेशन के युवा आधिकारियों की सूझ बूझ से कई ऐसे मामलों को सुलझाया जा चुका है, जिसका कोई श्रोत नहीं था। इसके बावजूद ट्राम्बे डिवीज़न (Trombay Division) के ए सी पी श्रीकांत देसाई और सीनियर पी आई सोपान निगोठ के मार्गदर्शन में आरसीएफ पुलिस स्टेशन की डिटेक्शन टीम और खोजी दस्तों ने कहीं सीसीटीवी तो कहीं मोबाइलों के जरिये भगोड़ों व लापता मुंबईकरों को ढूंढ कर उनकी मंजिल तक पहुंचाने में काफी मशक्कत की है।
अगर 2019 के आंकड़ो पर नजर डाले तो मेन पावर कम होने के बावजूद ऐसे मामलों को सुलझाने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करना चाहिए। इन आंकडों का खुलासा होने से यहां कि विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं ने मन बनाया है कि आरसीएफ पुलिस के जाबांजो को सम्मानित करना चाहिए। आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2019 तक कुल 250 मुंबईकर लापता हुए, इनमें 218 लोगों को आरसीएफ पुलिस ने राज्य सहित देश के विभिन्न हिस्सों से ढूंढ कर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाया है। लेकिन इस पुलिस स्टेशन की हद से लापता 32 लोगों की तालाश अब भी जारी है, इनमें 17 महिलाएं हैं।
इस क्षेत्र से लापता लोगों की तलाश करने वाली टीम में पुलिस उपनिरिक्षक दीपक चव्हाण, हेड कॉस्टेबल ज्ञानेश्वर भोर और पुलिस नाईक महेश केदारे हैं। जबकि इस टीम के मुखिया एसीपी श्रीकांत देसाई और वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक सोपान निगोठ हैं। बताया जाता है कि कुल लापता लोगों में 4 मासूम बच्चे भी थे। इनमें 2 की तलाश पूरी हुई लेकिन 2 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं 111 महिलाओं व 95 पुरूषों में से 14 को छोड़ कर बाकी सभी को पुलिस ने कहीं न कहीं से ढूंढ निकाला है। इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के 9 (नाबालिग) लड़के व 31 लापता लड़कियों को भगा कर या खुद भागने वालों में से आधिकांश को आरसीएफ की टीम ने ढूंढने में सफलता पाई है। ऐसे में आरसीएफ पुलिस की हद से लापता कुल 250 मुंबईकरों में से सिर्फ 32 की तालाश बाकी है।
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