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प्रेमचंद रंगशाला में मुंशी प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी नाटक का मंचन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में 9 जुलाई को नाद पटना की ओर से मुंशी प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी नाट्य की प्रस्तुति की गयी। जिसका सफल निर्देशन मो. जानी ने किया। उक्त जानकारी कलाकार साझा संघ के सचिव सह प्रसिद्ध टीवी कलाकार मनीष महीवाल ने दी।

प्रस्तुत नाटक देश के महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानी बूढी काकी पर आधारित है, जिसका नाट्य रूपांतरण विवेक कुमार द्वारा किया गया है। प्रस्तुत नाटक में एक वृद्ध महिला बूढी काकी मुख्य पात्र है। काकी शारीरिक रूप से निर्बल है, किंतु जैसा कि बुढ़ापा में अक्सर होता है, उसकी स्वादेन्द्रियां सक्रिय हैं। उक्त नाटक में मध्यम वर्गीय परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा को भी वर्णित किया गया है।

नाटक के अनुसार काकी को भतीजे के घर में उपेक्षित हो कर रहना पड़ता है। अंततः काकी की बहू को अपने अपराध का अनुभव होता है और वह ग्लानि का अनुभव करती है। उक्त नाटक वृद्धावस्था की समस्या को अपने केंद्र में रखकर एक वैवाहिक आयोजन पर समाप्त हो जाता है, जब एक वृद्धा अपने घर के आयोजन में ही उपेक्षित और तिरस्कृत होकर जूठे पत्तल चाटने को विवश हो जाती है। यह नाटक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवारों में वृद्धाओं की स्थिति को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रकट करने का प्रयास है।

नाटक के मंच पर बूढ़ी काकी- अपराजिता कुमारी, रूपा-कोमल कुमारी, लाडली-सानिया परवीन, बड़की-सोना, बुद्धिराम-सोनु कुमार, मुखराम-हर्ष कुमार, शादीराम-रवि कुमार, सूत्रधार-प्रिंस राज, अभिषेक कुमार, प्रियांशु कुमार, मो. आसिफ, सुनील नौबतपुरी तथा आदर्श आर पटेल व् शहरी बाबू का अभिनय दीपक कुमार ने किया।

महीवाल के अनुसार मंच से परे ढोलक पर सहदेव चौधरी, काँगो पर राजीव घोष, बांसुरी पर राजेश कुमार सिंह, झाल व् खंजरी अरविंद कुमार, प्रकाश परिकल्पना विनय चौहान, रूप सज्जा जितेन्द्र कुमार जीतू, वस्त्र विन्यास सौरभ शेखर तथा संगीत, परिकल्पना एवं निर्देशन मो. जानी ने नाटक को जीवंत बना दिया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने जमकर सराहा।

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