प्रहरी संवाददाता/कोडरमा (झारखंड)। झारखंड के कोडरमा जिला के हद में बांझेडीह स्थित दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के पावर प्लांट में बीते 15 दिसंबर को कार्यस्थल पर हुई एक मज़दूर की मौत मामले में जारी आन्दोलन को 24 दिसंबर को प्रशासन (Administration) और प्रबंधन की बैठक में जबरदस्ती समाप्त करवा दिया गया। उक्त जानकारी भाकपा माले नेता विकास सिंह ने दी।
माले नेता सिंह ने बताया कि 24 दिसंबर को डीसी कोडरमा की उपस्थिति में प्रबंधन और नेताओं की बैठक हुई, जिसमें डीसी की प्रबंधन परस्त नीति का विरोध करने पर माले के मजदूर नेता विजय पासवान के ऊपर डीसी भड़क गए और उन्हें मिटिंग से बाहर कर देने की धमकी देने लगे, आदि।
लेकिन जब विजय पासवान ने कहा कि या तो जेल भेज दीजिए या मृत मजदूर के आश्रित को बीस लाख मुआवजा दीजिए तब डीसी जो शुरू में दो लाख दिये जाने की बात कह रहे थे, पासवान के अड़ जाने पर पांच लाख रुपए देने की घोषणा कर मिटिंग से उठकर चल दिए और धारा 144 लगवा कर आंदोलन को भी समाप्त करने को मजबूर कर दिए।
माले नेता सिंह ने कहा कि शर्म की बात यह है कि उस बैठक में कोडरमा विधायक नीरा यादव, बरकट्ठा विधायक अमित यादव सहित सभी दलों के नेता उपस्थित थे लेकिन विजय पासवान ने जब दो लाख मुआवजा तय करने के खिलाफ बोलना शुरू किए और यह कहकर मुआवजे की राशि बढ़ाने की बात किए कि वर्ष 2015 में मुआवजा 15 लाख मिला, फिर उसके बाद दस लाख मिला, फिर सात लाख दिया गया।
मुआवजे की राशि बढ़ाने के बदले कम किया जा रहा है। आगे मजदूरों की मौत होने पर शायद कुछ भी नहीं मिलेगा। इसी बात पर डीसी नाराज़ हो कर पासवान पर गर्मी दिखाने लगे, लेकिन उस बैठक में उपस्थित किसी नेता ने डीसी की उदंडता का विरोध नहीं किया।
उन्होंने कहा कि अगर हम मजबूती से नहीं लड़े तो आने वाले समय में सुरक्षा नियमों को और भी शिथिल कर दिया जाएगा और दुर्घटना में मरने वाले मजदूरों को कुछ भी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि नौ दिनों तक मजदूर अपनी ताकत पर लड़ाई लड़ते रहे और जो भी हासिल किए वो अपनी ताकत पर ही हासिल किए।
माले नेता ने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका बहुत शर्मनाक रही। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार बनाने वाले आदिवासी-दलित-अत्यन्त पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ जो ब्यवहार हो रहा है वह भाजपा सरकार से किसी मामले में बेहतर नहीं है।
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