सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। ओडिसा प्रांत बड़बील क्षेत्र के समाज सेवी गुरुदयाल सिंह ने विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर बीते 17 सितंबर को एक भेंट में बताया कि आज जिस संसार को हम देख रहे है, उस संसार को भगवान विश्वकर्मा ने सजाने एव संवारने का कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि 17 सितम्बर को भगवान ब्रह्मा के सातवें पुत्र विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। जब ब्रह्मा जी ने इस संसार की रचना की थी तो उन्होंने इसको सजाने और संवारने का जिम्मा देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को ही सौंपा था। इसी दिन सूर्य कन्या राशि में गोचर होता है। इस दिन देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विधान है।
उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा पूजा का मंत्र: ॐ आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम: है। कहा कि मानव को प्रात: स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए। इसके उपरांत हीं ईश्वर की आराधना करना श्रेयस्कर है।
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