प्रहरी संवाददाता/जमशेदपुर (झारखंड)। झारखंड व् उड़ीसा की सीमा क्षेत्र के झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में सारंडा वन विभाग के को-ऑर्डिनेटर विपिन प्रधान ने 9 मई को बताया कि वर्तमान में कारो नदी को प्रदूषण मुक्त एवं सुरक्षित किया जाना नितांत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कारो नदी इस सारंडा वन क्षेत्र में रहने वाले रहिवासियों के जीवन का आधार है। दिन प्रतिदिन नदी प्रदूषित होने से जन समस्या बढ़ती जा रही है। प्रदूषण को रोकने एवं नदी को सुरक्षित रखने के लिए समूह को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
कारो नदी उड़ीसा ही नहीं बल्कि झारखंड राज्य कि सारंडा वन क्षेत्र के रहिवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्व में वन विभाग गुवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी गणेश लाल भगत के द्वारा कारो नदी के सफाई का अभियान चलाया गया था।
बरहाल नदी के घटते जलस्तर एवं प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इसे प्रदूषण से बचाने हेतु मुहिम चलाना नितांत आवश्यक है। बगैर एकजुटता से मुहिम चलाएं बिना नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है।
को-ऑर्डिनेटर विपीन प्रधान ने बताया कि जब तक इस संदर्भ में जनसभा कर पहल नही की जाएगी, समस्या को विराम नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि उड़ीसा एवं झारखंड से जुड़े कारो करमपदा क्षेत्र से प्रवाहित होने वाले कारो नदी के लिए एक बैठक किरीबुरू में आयोजित की जाएगी। जिसमें वाइल्ड लाइफ एवं मानव को बचाने हेतु कारो नदी की उपयोगिता पर विचार विमर्श किया जाएगा।
328 total views, 1 views today