सामयिक परिवेश द्वारा सोनपुर मेला में गजल संध्या का आयोजन

एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। एशिया के सुप्रसिद्ध सोनपुर मेला में सामयिक परिवेश की टीम ने 21 नवंबर को भव्य कार्यक्रम पेश किया। जिन में विशेष रूप से ग़ज़ल गायिकी और ग़ज़ल प्रस्तुति शामिल है।

इस अवसर पर जहां सामयिक परिवेश के संस्थापक ममता मेहरोत्रा की ग़ज़ल प्रस्तुत की गई। वहीं डॉ प्रतिभा रानी, मुजफ्फरपुर की युवा गजलकारा सविता राज और हिंदी उर्दू के प्रसिद्ध शायर क़ासिम खुर्शीद व् राकेश ने अपनी ग़ज़लें पेश की।

यहां आयोजित गजल संध्या में ममता मेहरोत्रा की गजल ने शमां बांध दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत ग़ज़ल में लाख जतन करने पड़ते हैं इश्क की मंजिल पाने को, दिल हारा है तब जीता है मैने इक दीवाने को ने महफिल को खुशनुमा बना दिया। डॉ क़ासिम खुर्शीद की कई ग़ज़लों से माहौल शराबोर रहा।

जिसमें वो गिरते हैं संभलते हैं सहारों पर नहीं चलते, अंधेरों के ये जुगनू है उजालो पर नहीं चलते, तमाशा देखने वाले तो बस साहिल पे रहते हैं, जिन्हें उस पार जाना हो किनारों पर नहीं चलते शामिल है। गजल संध्या में मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री व् गजलकारा सविता राज ने सुंदर अंदाज में अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की। उनकी ग़ज़ल आज के संदर्भ में थी।

जिसमें ग़मों में कब कहां कोई यहां दामन बचाता है,
जरा सा मुस्कुराने पर जमाना रूठ जाता है शामिल है। यहां गजलकारा प्रतिभा रानी ने भी प्रभावशाली ढंग से अपने कई कलाम प्रस्तुत की, जिसमें इश्क में गर जो मेरी तासीर होगी, दिल तुम्हारा मेरी ही जागीर होगी ने मानो उपस्थित जनों के दिलो में जलजला ला दिया।

कार्यक्रम में लगभग ढाई घंटे तक सभी कलाकारों ने दर्शकों को बांधे रखा। वहीं ग़ज़ल गायिकी लोक गीतों का रंग भी सजाया गया।सामयिक परिवेश की नृत्य समूह ने भी सभी का मनोरंजन किया। नृत्य टीम में राकेश, उज्ज्वल कुमार, राजन कुमार, अनुज कुमार, दिव्या कुमारी, आंचल कुमारी, मनोरंजन कुमार, ऋतु कुमार, नीतू नवगीत टीम भी बधाई के पात्र रहे।
विदुषी साहित्यकार ममता मेहरोत्रा के मार्गदर्शन में इस आयोजन को याद रखा जाएगा। सारण जिला प्रशासन ने अंत में सामयिक परिवेश टीम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

 84 total views,  1 views today

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *