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सोनपुर के संगत ग्रैंड में हरिहर क्षेत्र साहित्य उत्सव की आभार यात्रा शुरू

गीत जब मर जाएगा, यहाँ क्या रह जाएगा संदेश के साथ साहित्यसेवियों की कृतज्ञता

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित संगत ग्रैंड में हरिहर क्षेत्र साहित्य उत्सव की अपार सफलता के बाद आयोजकों ने आभार यात्रा प्रारंभ की है।

गीत जब मर जाएगा, फिर यहां क्या रह जाएगा, एक सिसकता आंसुओं का कारवां रह जाएगा। कवि गोपाल दास नीरज की इस पंक्ति के प्रेरक संदेश के साथ उत्सव से जुड़े सेवियों ने यह यात्रा शुरू की है। आभार यात्रा के प्रथम चरण में 29 अक्टूबर को साहित्य उत्सव के महासचिव तृप्तिनाथ सिंह एवं साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी के नेतृत्व में टीम पिरामिड के डायरेक्टर एवं सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञानेंद्र कुमार सिंह टुनटुन के आवास पर पहुंचकर उन्हें आभार पत्र समर्पित किया गया।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष के हरिहर क्षेत्र साहित्य उत्सव में कई जिलों और अन्य राज्यों के 45 से अधिक विद्वानों, कवियों और रचनाकारों ने भाग लिया था। सभी सहभागी रचनाकारों को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा सम्मानित किया गया था। इस अवसर पर साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने कहा कि यह उत्सव तभी पूर्ण माना जाएगा, जब हम उन सभी रचनाकारों, साहित्य प्रेमियों और समाजसेवियों के द्वार पर जाकर आभार पत्र समर्पित करें, जिनका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उसी संकल्प की पूर्ति है। कहा कि इस शब्द-यज्ञ में बिंदु और सिंधु, सभी का शारीरिक, मानसिक और शब्दिक सहयोग रहा है। कोई दो कदम साथ चला तो कोई अंतिम पड़ाव तक।

महाकवि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की पंक्तियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। मानपुरी ने कहा कि कवि और लेखक को दूसरा प्रजापिता अर्थात ब्रह्मा माना गया है। शब्द की शक्ति उन्हें प्राप्त होती है, जिनमें सृजन और वसुधैव कुटुंबकम् की संस्कृति को कायम रखने की जन्मजात प्रतिभा होती है। कहा कि समाज यदि जीवंत है तो साहित्य के कारण ही है। इसलिए आज साहित्य को पहले से अधिक ऊर्जा और शक्ति की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि आभार यात्रा का प्रथम संक्षिप्त चरण महासचिव तृप्तिनाथ सिंह के साथ पूरा किया गया है। अगले विस्तृत चरण में अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप के साथ उन सभी सहयोगियों को आभार पत्र समर्पित किया जाएगा, जिन्होंने इस साहित्यिक आयोजन में किसी भी रूप में योगदान दिया है।

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