एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। मुजफ्फरपुर की लीची की पहचान, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से लीचीपुरम बोर्ड की स्थापना की मांग तेज हो रही है।
इसी क्रम में मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह महाविद्यालय में बीते दिनों आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के संस्थापक एवं पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश बाबू एवं बोचहां की विधायक देवी कुमारी को लीचीपुरम की अवधारणा से अवगत कराया।

उन्होंने लीचीपुरम बोर्ड की स्थापना की मांग रखते हुए उपर्क दोनों जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में ज्ञापन तथा लीचीपुरम : एक अनहद सृजन पुस्तक भेंट की। उल्लेखनीय है कि उक्त पुस्तक के लिए दोनों जनप्रतिनिधियों ने पूर्व में अपने शुभकामना संदेश भी भेजे थे, जो पुस्तक की गरिमा बढ़ा रहे हैं।
लीचीपुरम की परिकल्पना
पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता के अनुसार मुजफ्फरपुर की शाही लीची को केवल एक फल तक सीमित न रखकर उसे शहर की सांस्कृतिक पहचान, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योग एवं सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ने का प्रयास है। लीचीपुरम बोर्ड की स्थापना से इन सभी क्षेत्रों के समन्वित विकास को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रधानाचार्या कनुप्रिया, भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी लाल, क्रांति प्रकाश, भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ कौशल चौधरी तथा सत्यनारायण शाह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने बताया कि लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान का उद्देश्य है कि मुजफ्फरपुर की लीची की मिठास उसकी सांस्कृतिक पहचान, हरियाली, रोजगार और विकास में भी प्रतिबिंबित हो तथा शहर की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिले।
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