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डिटीओ समेत चार सरकारी कर्मियों पर हमला का आरोप, परमिट जांच में मचा बवाल

कुलगो टोल के समीप मारपीट; सिर पर वार, चश्मा टूटने, कपड़ा फटने का आरोप

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड के गिरिडीह जिले में सरकारी ड्यूटी के दौरान परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम के साथ कथित मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है।
गिरिडीह जिला के हद में डुमरी थाना प्रभारी को बीते 13 अक्टूबर की संध्या दिए गए लिखित आवेदन में जिला परिवहन पदाधिकारी (डिटीओ) संतोष कुमार समेत चार सरकारी कर्मियों ने आरोप लगाया है कि कुलगो टोल प्लाजा के समीप एक यात्री बस के परमिट की जांच के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की कोशिश की गई।

थाना प्रभारी को दिए आवेदन के मुताबिक, घटना बीते 13 अक्टूबर को अपराह्न लगभग 4:55 बजे की है। उस समय जिला परिवहन पदाधिकारी संतोष कुमार, मोटरयान निरीक्षक शुभम लाल सिंह, सूचना प्रौद्योगिकी सहायक साकेत भारतीय और वाहन चालक बालेश्वर मरांडी परिवहन विभाग के प्रवर्तन कार्य में लगे थे।

लिखित शिकायत के अनुसार, कुलगो टोल प्लाजा के समीप प्रवर्तन कार्य के दौरान टीम ने एक यात्री बस को रोककर उसका परमिट मांगा। आवेदन में बस का पंजीकरण क्रमांक-WB51C/8298 बताया गया है। बस मालिक के रूप में तंजीमा नाग और चालक के रूप में वरुण का नाम दर्ज है।
आरोप है कि बस के परमिट की जांच के दौरान आसपास मौजूद दुकानदारों, स्थानीय रहिवासियों, बस चालक, सह-चालक और कई यात्रियों ने टीम के काम में बाधा डाली। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद पूरी टीम पर हमला किया गया।

आवेदन में डिटीओ संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके सिर पर कड़े औजार से हमला किया गया, जिससे उनका चश्मा टूट गया और कपड़े भी फट गए। शिकायत में अन्य दो कर्मियों के साथ भी मारपीट किए जाने का उल्लेख है। आवेदन के अनुसार टीम के सदस्यों को कथित हमले के दौरान जान बचाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, घटना में किसकी क्या भूमिका रही और आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, यह पुलिस की जांच का विषय है। संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद मामले के दूसरे पहलुओं की भी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। परिवहन विभाग की टीम ने अपने आवेदन में दावा किया है कि कुलगो टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना कैद हुई हो सकती है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि उनके पास घटना से संबंधित कुछ तस्वीरें मौजूद हैं। उन्होंने पुलिस से मामला दर्ज कर मामले की जांच करने, सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने और घटना में शामिल आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

सरकारी ड्यूटी के दौरान प्रवर्तन टीम के साथ कथित मारपीट का यह मामला कई सवाल खड़े करता है। क्या परमिट की जांच को लेकर विवाद हुआ था? घटना के समय मौके पर कौन-कौन मौजूद था? सीसीटीवी फुटेज में क्या सामने आता है? और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होगी? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल, लिखित आवेदन में लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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