एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार के सौजन्य से बीते 28 से 30 मई तक नाट्य महोत्सव का विधिवत समापन हो गया।
सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा प्रतिदिन संध्या 7 बजे से तीन दिवसीय दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन सारण जिला के हद में मशरख प्रखंड के गांव सेरूकहां में आयोजित किया गया।
जानकारी देते हुए कलाकार साझा संघ के सचिव सह प्रसिद्ध टीवी कलाकार मनीष महीवाल ने बताया कि नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन 30 मई को कार्यक्रम के समापन पर पहली प्रस्तुति लोक पंच द्वारा नाट्य शिक्षक की बहाली का मंचन किया गया। यह नाटक रंगकर्मियों के जीवन पर आधारित था।
महीवाल ने बताया कि नाटक में रंगकर्मियों के व्यक्तिगत जीवन के संघर्ष को अलग अलग कहानियों के माध्यम से दिखाया गया, जिसमें एक रंगकर्मी के जीवन के उस पहलू को उकेरा गया जहाँ वह पढ़ाई के बाद भी अपने परिवार और समाज में उपेक्षित है। उसे स्कूल, कॉलेज में एक अदद नाट्य शिक्षक की नौकरी भी नहीं मिल सकती, क्योंकि हमारे यहां नाटक शिक्षकों की बहाली का कोई प्रावधान नहीं है, इस मुखर सवाल पर आकर नाटक दर्शकों के लिए रंगकर्मियों के जीवन संघर्ष से जुड़ा कई सवाल भी छोड़ जाता है।
दिखाया गया कि नाटक खत्म होने के बाद स्मृति चिन्ह देकर व ताली बजाकर दर्शक उसे सम्मानित करते हैं। यही रंगकर्मी जब अपने घर पहुंचता है तो घर में उससे बेहूदा किस्म के प्रश्न पूछे जाते हैं। ये सब क्या कर रहे हो? नौटंकी करते हो? नाटक करने से क्या होगा? इस तरह के अनगिनत ताने सुनने पड़ते हैं, फिर भी रंगकर्मी यह सब सहने के बावजूद रंगकर्म करते रहते हैं।
नाटक के माध्यम से रंगकर्मी सरकार से मांग करते हैं कि स्कूल और कॉलेजों में नाट्य शिक्षक की बहाली हो। सरकार रंगकर्मियों को नौकरी दे। उन्हें रोजगार दे, तभी वे भी खुलकर समाज का साथ दे सकते हैं। नाटक के मंच पर अभिषेक राज, दीपा दीक्षित, अजीत कुमार, उर्मिला, सहर्ष शुभम, अरबिंद कुमार, रजनीश पांडेय, सोनल कुमारी, नीरज, राम प्रवेश, मनोज शुक्ला एवं मनीष महिवाल तथा मंच से परे प्रकाश परिकल्पना उपेंद्र कुमार, ध्वनि संचार हर्ष कुमार, मेकअप सोनल कुमारी, वस्त्र विन्यास रितिका, नाल पर मनोज शुक्ला, ढोलक पर अजीत कुमार, खंजरी अरविंद कुमार ने संगत की। वहीं प्रस्तुति नियंत्रक राम प्रवेश तथा लेखक-निर्देशक मनीष महिवाल ने सहयोग किया।

इस अवसर पर दूसरी प्रस्तुति रंग रूप वैशाली द्वारा लोक नृत्य का रहा। जिसमें पनिया के जहाज से पलटनिया बन अइहा पिया ले ले आईह, रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, बहे पुरवइया अचरिया उड़े हो रामा आदि भाव नृत्यों ने दर्शकों को खूब झुमाया। तीसरी प्रस्तुति दीपा दीक्षित द्वारा लोक गीतों का रहा। जिसमें अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, प्यार यदि जग में रहती ना पवित्र, हे मुरलीधर छलिया मोहन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
महोत्सव के समापन के दौरान स्थानीय संयोजक मुसाफिर राय, मोसाहेब राय, सुनील राय एवं शिवपूजन राय आदि ग्रामीण रहिवासियों ने कलाकारों का आभार व्यक्त किया और निवेदन किया कि अगले साल भी हमारे गांव में दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन करें। अन्त में संस्था के सचिव मनीष महिवाल ने संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार सहित स्थानीय संयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की।
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