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शिक्षा के एक दीप का अवसान; नहीं रहे नारायणी विद्या दान के समर्पित केदार राय

प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। शिक्षा की लौ जलाकर जो खुद मशाल बन गए, यादों के पन्नों पर वे अमिट मिसाल बन गए। उनके अमूल्य भेंट को समाज अवश्य याद रखेगा। ऐसे हीं एक महान विभूति शिक्षाविद् केदार राय का अब अवसान हो गया।

सारण जिला के हद में ​हरिहरक्षेत्र की पावन धरती सोनपुर आज गमगीन है। शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और नारायणी विद्या दान के संकल्प को अपने जीवन का ध्येय बनाने वाले प्रखर शिक्षक केदार कुमार राय अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका 26 अप्रैल को नारायणी नदी के तट पर स्थित नमामि गंगे भारत वंदना घाट पर आयोजित एक शोक सभा में वक्ताओं ने श्रद्धांजलि सभा में उपरोक्त बातें कही।

​​विदित हो कि पिछले सप्ताह दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में सबलपुर रहिवासी केदार राय गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बिहार की राजधानी पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र के शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं में शोक की लहर दौड़ गई।

उनके निधन के पश्चात ​नारायणी के तट पर आयोजित शोक सभा की शुरुआत दो मिनट के मौन के साथ की गयी। मंच के संस्थापक अनिल कुमार सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि केदार राय केवल एक शिक्षक नहीं बल्कि, वे प्रतिभा के धनी और एक ऐसे पथ-प्रदर्शक थे जिनका स्थान अब बिरले ही कोई ले पाएगा। मंच के महासचिव अमरनाथ तिवारी ने उनके विचारों को जीवंत बताते हुए कहा कि नारायणी विद्या दान के संस्कारित बच्चे अपनी सफलता से ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देंगे। सभा का कुशल संचालन करते हुए प्रधानाचार्य आलोक कुमार ने उन्हें समय-पालन का प्रतीक और सांस्कृतिक प्रकल्प हरिहरक्षेत्र दीपोत्सव का मजबूत स्तंभ बताया।

छात्रों की सिसकियों ने बयां किया दर्द

भारत वंदन घाट पर आयोजित ​शोक सभा में बड़ी संख्या में पहुंचे छात्र-छात्राएं अपने प्रिय गुरु को याद कर फूट-फूट कर रो पड़े। अंजली, निशांत, आयुष और सीमा जैसे दर्जनों विद्यार्थियों ने बताया कि केदार सर के सिखाए सबक अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। कहा कि वे मात्र अक्षरों का ज्ञान नहीं देते थे, बल्कि हमें एक बेहतर इंसान बनने का संस्कार देते थे।

​पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में साहित्यकार प्रो. वीरमणि राय, कुंदन सिंह (रिटायर्ड नेवी अधिकारी), विजय कुमार (पूर्व वायु सेना अधिकारी), जल मजदूर नेता राजाराम सहनी सहित क्षेत्र की तमाम गणमान्य हस्तियां शामिल थीं। शिक्षक निशांत कुमार, बीरकांत, अनिकेत और रागिनी सहित पूरी टीम ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

​ निष्कर्ष यह कि दिवंगत केदार कुमार राय का भौतिक शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन शिक्षा की जो जोत उन्होंने नारायणी विद्या दान के माध्यम से जलाई है, वह आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी। हरिहरक्षेत्र ने आज अपना एक सच्चा कर्मयोगी खो दिया है।

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