शाकाहार अपनाएं: निरोग रहें, कुदरत के कहर से बचें
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। जब जन-जन की जुबान पर जयगुरुदेव नाम आएगा, तभी यह राष्ट्र सच्ची स्वतंत्रता का आनंद पाएगा। यह प्रेरणादायी उद्गार जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था (मथुरा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकजजी महाराज ने व्यक्त किए।
सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित खरिका ग्राम में आयोजित विशाल सत्संग के दौरान पंकजजी महाराज 17 अप्रैल को मानवता, सदाचार और रूहानियत का संदेश दिया। अपने संबोधन में महाराजजी ने जय गुरुदेव नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उस सर्वशक्तिमान सत्ता का जागृत नाम है, जिसे परम संत बाबा जयगुरुदेव महाराज ने अपनी साधना से सिद्ध किया था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न काल खंडों में कबीर साहब ने साहब, नानकजी ने वाहेगुरु और गोस्वामी तुलसीदास ने राम नाम को जगाकर जीवों का कल्याण किया, उसी प्रकार वर्तमान में जय गुरुदेव नाम दुःख और संकट की घड़ी में रक्षक की भूमिका निभाता है। कहा कि मृत्यु की असहनीय वेदना के समय भी यदि किसी के कान में दस बार प्रभु का यह नाम लिया जाए, तो उसे असीम शांति और राहत मिलती है।
सोनपुर से पुराना नाता और वैचारिक क्रांति
महाराजजी ने भावुक होते हुए स्मरण कराया कि वर्ष 1971 में परम संत बाबा जयगुरुदेव ने इसी सोनपुर की ऐतिहासिक धरती से 1200 मील की लंबी साइकिल यात्रा का शुभारंभ किया था। उन्होंने समाज को आगाह किया कि भविष्य में होने वाली कुदरती आपदाओं और हिंसा से बचने का एकमात्र रास्ता शाकाहार, सदाचार और नशामुक्ति ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मनुष्य अपनी आदतों में सुधार नहीं करेगा, तो प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन होगा।

बिहार में चल रही 67 दिनों की लंबी शाकाहार-सदाचार जनजागरण यात्रा का आज 42वां दिन था। इस दौरान महाराजजी ने आगामी 17 से 21 मई तक मथुरा स्थित जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित होने वाले 14वें वार्षिक भंडारा सत्संग मेले के लिए सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। सोनपुर में कार्यक्रम की सफलता के बाद यह यात्रा अपने अगले पड़ाव, ग्राम मानस (थाना अतीलपुर, दानापुर, जिला पटना) के लिए प्रस्थान कर गई, जहाँ 18 अप्रैल को पूर्वाह्न 11:30 बजे से भव्य सत्संग का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष संतोष कुमार, दिलीप राय, घनश्याम सिंह, लक्ष्मी महतो, प्रमोद पांडेय सहित सीतापुर संगत के मोतीलाल मौर्य व सुरेंद्र सिंह चौहान जैसे अनेक गणमान्य भक्त उपस्थित रहे। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी शांति व्यवस्था बनाए रखने में सराहनीय सहयोग दिया। इस दौरान शाकाहारी बनें, नशा त्यागें का संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर संतों ने उपस्थित रहिवासियों को आगामी 17 से 21 मई को मथुरा भंडारे में सम्मिलित होने का निमंत्रण भी दिया गया। इस यात्रा का उद्देश्य आध्यात्मिक जागृति और समाज सुधार करना रहा है।
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