प्रहरी संवाददाता/गोमिया (बोकारो)। उत्तर भारत में मजदूरों पर पुलिसिया दमन को लेकर सीटू ने निंदा की है। सीटू नेताओं ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर सहित उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों पर हो रहे पुलिस दमन को बर्बर बताते हुए कड़ी निंदा की है। सीटू के देशव्यापी आह्वान के तहत बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड के आईईएल स्थित सीटू कार्यालय में 16 अप्रैल को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विरोध जताया गया।
सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष कॉमरेड रामचंद्र ठाकुर एवं राज्य कमेटी सदस्य कॉ राकेश कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न शहरों में 50,000 से अधिक औद्योगिक मजदूर कम वेतन और ठेका प्रथा के खिलाफ आंदोलनरत हैं। आरोप है कि पुलिस इन मजदूरों पर लाठीचार्ज कर रही है और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीटू नेताओं समेत कई मजदूरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। सीटू नेताओं ने कहा कि इन क्षेत्रों में मजदूरों को दस हजार से तेरह हजार तक मासिक वेतन मिल रहा है।
मजदूरों kob12 घंटे काम करने के बावजूद ओवरटाइम और बोनस नहीं दिया जाता है। कई मजदूर 333 रूपये रोज पर काम करने को मजबूर हैं। कहा गया कि यह सिर्फ औद्योगिक विवाद नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा मजदूर आंदोलन को कुचलकर कॉरपोरेट हितों को फायदा पहुंचाने की साजिश है।
कहा गया कि चार लेबर कोड लागू होने के बाद शासकों और औद्योगिक मालिकों की भूमिका सामने आ रही है। वही सीटू ने अपनी मांगों को लेकर कहा कि मजदूरों पर दमन और गिरफ्तारियां तुरंत बंद हों, सरकार न्यूनतम मजदूरी ₹26000 हजार प्रतिमाह तय करे एवं 8 घंटे काम की गारंटी दी जाए। मौके पर सीटू के कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
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