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नियोजन मिलने तक रोड से कोर्ट तक जारी रहेगा संघर्ष-चंदन

चांपी लेबर को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने मनाया अपना 52वां स्थापना दिवस

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष चांपी लेबर को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा 22 मार्च को सोसाइटी का स्थापना दिवस मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व जिप सदस्य दिलीप मुर्मू, संचालन सोसाइटी के सचिव चंदन सिंह गौतम तथा धन्यवाद ज्ञापन परमेश्वर राम ने की। यहां बड़ी संख्या में सोसाइटी के हितधारक महिला, पुरुष उपस्थित थे।

इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए पूर्व जिप सदस्य मुर्मू ने कहा कि प्रबंधन लगातार सोसाइटी के मजदूरों को छलने का काम कर रही है। इसे लेकर चांपी के मजदूर संघर्ष को तेज करेंगे। सचिव चंदन ने कहा कि सोसाइटी अपना 52वां स्थापना दिवस मना रही है, लेकिन प्रबंधन की दोहरी नीति के कारण आज भी स्वांग वाशरी के आवार्डी मजदूर नियोजन के अभाव में दर दर भटक रहे है। कहा कि जबतक उन्हें न्याय नहीं मिलता है, तबतक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वे रोड से कोर्ट तक संघर्ष करते रहेंगे।
सोसाइटी के सचिव ने कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन जानबूझकर मामले को टाल रही है और सोसाइटी के साथ वार्ता करने से मुकर रही है।

कारण यह कि वर्ष 2012 में जिसे स्वांग वाशरी प्रबंधन ने नियोजन दिया था, उसे हीं वर्ष 2017 में प्रबंधन द्वारा काम से हटा दिया गया। जबकि, वर्ष 1991 से वर्ष 2009 तक काम का आबंटन चांपी लेबर को-ऑपरेटिव सोसाइटी के नाम आबंटित है। बावजूद इसके प्रबंधन आनन फानन में एक निजी ट्रेड यूनियन नेता के सत्यापन पर फर्जी बहाली की थी। जिसे बाद में हटा दिया गया और उक्त नेता को न्यायालय द्वारा फर्जी बहाली मामले में दोषी करार देकर एक साल का सजा मुकरर किया गया। कहा कि सीसीएल कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन तथा स्वांग वाशरी प्रबंधन अपनी गलती को छिपाने के लिए नियोजन मामले को अनावश्यक रूप से टाल रही है।

इससे पुर्व सैकड़ो की संख्या में महिला, पुरुष चांपी लेबर को-ऑपरेटिव सोसाइटी के बैनर तले जुलूस निकालकर महाप्रबंधक कार्यालय सभा स्थल से नारा लगाते कथारा मोड़ पहुंचकर पुनः वापस महाप्रबंधक कार्यालय सभास्थल पहुंचा, जहां सोसाइटी के संस्थापक स्व. किशुन मांझी के चित्र पर माल्यार्पण व् पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी।

सभा व् जुलूस में जगदीश महतो, रामचंद्र यादव, वासुदेव रविदास, सहदेव कुमार, महावीर तुरी, मोहन यादव, शिवशंकर राम, जयनंदन गोप, सुरेश राम, अर्जुन रविदास, भोला मांझी, अशोक लाल श्रीवास्तव, जनार्दन यादव, लालजी रविदास, मुरारी राम, उदय शंकर रवि, पार्वती देवी, प्रमिला देवी, धनेश्वरी देवी, राधा देवी, यशोदा देवी, कबूतरी देवी, चिंता देवी, मंजु देवी, सितवा देवी, सुरभि देवी आदि ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।

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