अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल में वासंती चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन 20 मार्च को देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा भक्ति भाव के साथ की गयी। चतुर्दिक देवी मंदिरों में या देवी सर्वभूतेषु के मंत्रों की गूंज सुनाई पड़ रही है।
इस संबंध में सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री एवं पुजारी पवनजी शास्त्री ने बताया कि माता ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। ये नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाती हैं। बताया कि ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली या तपस्या में लीन। मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण करती हैं, उनके दाहिने हाथ में जपमाला (रुद्राक्ष की माला) और बाएं हाथ में कमंडल (जल का पात्र) होता है।
उन्होंने बताया कि तप का आचरण करने वाली या तपस्या में लीन मां ब्रह्मचारिणी भी हिमालय राज की पुत्री पार्वतीजी ही हैं। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप मे प्राप्त करने के लिए घोर तप किया था। कहा कि देवी की तपस्यारत दो मूर्तियां सोनपुर के मंदिरों में दिखाई पड़ती है, जिसमें एक लोकसेवा आश्रम तथा दूसरा सोनपुर गांव के चिड़ैया मठ में स्थापित है। कहा कि इन मठ व् मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती हैं।
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