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अहंकार टूटने पर भक्ति स्वयं पहचान लेती है जयमाल-अनुराधा

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में जरीडीह प्रखंड के गांगजोरी स्थित श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित सप्तदिवसीय श्री108 हनुमंत महायज्ञ के दौरान बीते 17 मार्च की रात्रि प्रवचन में प्रभु श्रीराम सीता के विवाह प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

जानकारी के अनुसार उक्त प्रसंग पर व्याख्यान देते हुए श्रीधाम अयोध्या से पधारी मानस मंजरी अनुराधा सरस्वती ने अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस में वर्णन किया है कि मुनि विश्वामित्र के साथ दोनों भाई श्रीराम व लक्ष्मण सीताजी की स्वयंवर सभा में प्रवेश करते हैं, तब वहां जिसकी जैसी भावना थी, उसी रुप में भगवान राम का सभी ने दर्शन किया। कहा कि भगवान शिव की जिस धनुष को बड़े- बड़े बलवान राजा हिला भी नहीं सके, उसे भगवान श्रीराम ने गुरु का आशीर्वाद पाकर बड़े ही सहज भाव से तोड़ कर श्रीजानकीजी से मंगलमयी विवाह की।

उन्होंने कहा कि देवाधि देवी शिवजी की धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की प्रतिज्ञा थी जनक जी की, परंतु गुरु की आज्ञा पाकर रामजी ने धनुष को तोड़ दिया। इसका तात्पर्य यह है कि धनुष अहंकार का प्रतीक है और अहंकार को चढ़ाया नहीं जा सकता। उसे तोड़ने पर ही भक्ति रूपी सीता जयमाला पहनाती है।साधक का अहंकार टूटे और फिर जो भक्ति मिलती है वह परमात्मा द्वारा प्रदत्त होती है।

उक्त कथा को सुनकर उपस्थित श्रोतागण भावविभोर हो गए। व्यवस्था को संभालने में समिति के संरक्षक श्रीधर महतो, अध्यक्ष धीरेन्द्र महतो, उपाध्यक्ष मुकेश कुमार, सचिव राजेश कुमार, उप सचिव सुनील महतो, कोषाध्यक्ष विजय कुमार, उप कोषाध्यक्ष अजय कुमार, सत्यनारायण प्रसाद, भरत लाल, सदस्य प्रकाश कुमार, प्रदीप महतो, कृष्ण चंद्र, चक्रधारी प्रसाद, लालदेव महतो, कैलाश महतो, राजेश कुमार आदि सक्रिय दिखे।

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