एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में विद्या भारती विद्यालय कस्तूरबा श्रीविद्या निकेतन ढ़ोरी में 20 नवंबर को विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्था द्वारा सप्त शक्ति संगम का आयोजन किया गया।
यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मे आयोजित किया गया। विद्या भारती सप्त शक्ति संगम का आयोजन मुख्य रूप से मातृशक्ति (महिलाओं) के जागरण, सशक्तिकरण और समाज निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए करती है।
इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय संयोजिका सप्त शक्ति संगम उत्तर पूर्व क्षेत्र डॉ पूजा, सप्त शक्ति संगम प्रांतीय संयोजिका रंजना सिंह, सप्त शक्ति संगम अध्यक्षा गीता कुमारी, सप्त शक्ति संगम संकुल संयोजिका भगवती नोनिया, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर पिछरी की प्रधानाचार्य झरना चटर्जी आदि उपस्थित थी।
सप्त शक्ति संगम का प्रारंभ अतिथियों के स्वागत से किया गया। अतिथियों का स्वागत घोष दल एवं कन्या भारती की बहनों सुषमा कुमारी, नंदनी कुमारी (आचार्या) द्वारा तिलक लगाकर किया गया। सभी अतिथियों ने द्वीप प्रज्वलित कर मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्चन किया। सरस्वती वंदना के साथ इस आयोजन की शुरुआत की गयी। इस आयोजन में 300 माताओं ने भाग लिया।
सप्त शक्ति संगम आयोजन को आगे बढ़ाते हुए कन्या भारती की बहनों द्वारा हम ही मातृ शक्ति है गीत प्रस्तुत किया गया। भगवती नोनिया (संकुल संयोजिका) द्वारा सप्त शक्ति संगम की प्रस्तावना को प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि इसका उद्देश्य महिलाओं में निहित सात शक्तियों (जिन्हें ‘सप्तशक्ति’ कहा गया है) को जागृत करना और उन्हें समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।
इसके बाद डॉक्टर पूजा (क्षेत्रीय संयोजिका) द्वारा कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण के संबंध में भारतीय दृष्टिकोण को बताते हुए कहा गया कि भारतीय संस्कृति में परिवार को एक मूलभूत इकाई माना जाता है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि का आधार है। इसका उद्देश्य परिवारों में देश के प्रति जिम्मेदारी, सामाजिक समरसता और अच्छे नागरिक कर्तव्यों की भावना जागृत करना है। यह माना जाता है कि परिवार के माध्यम से ही जीवन मूल्य, मान्यताएं और संस्कार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होते हैं।

पारिवारिक सहयोग और अनुशासन से संसाधनों का उचित उपयोग होता है, जिससे समाज में स्थिरता आती है। इसलिए हम सभी को मां होने के नाते अपनी बच्चियों को सही शिक्षा एवं अनुशासन देना चाहिए जिससे भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिले। आयोजन को आगे बढ़ाते हुए रंजना सिंह (प्रांतीय संयोजिका) ने भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। सप्त शक्ति संयोजिका संजू ठाकुर ने माता के साथ प्रश्नोत्तरी खेल खेला।
इस दौरान माताओ से कई प्रश्न पूछे जिसका जवाब देने वाली माता को तुलसी का पौधा एवं पेन से पुरस्कृत किया गया। माताओ में से कुछ माता ने इस कार्यक्रम के प्रति अपने अनुभव को व्यक्त किया और बताया कि इस आयोजन से उन्हें क्या प्रेरणा मिली और ऐसे आयोजनों को क्यों आयोजित किया जाना चाहिए। पूरे आयोजन में मंच संचालन विभा सिंह द्वारा किया गया। अंत में शैलबाला कुमारी द्वारा आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की समाप्ति की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी आचार्य एवं आचार्या का सहयोग रहा।
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