अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला का कुत्ता बाजार देशी-विदेशी नस्ल के कुत्तों के साथ साथ पालतू रंग – बिरंगे चिड़ियों की उपस्थिति से गुलजार है। इन कुत्तों में जर्मन शेफर्ड, पावेलियन, लेब्रा, गोल्डेन नेटीवर, पग आदि शामिल हैं।
ज्ञात हो कि, यहां एक ओर विभिन्न नस्ल के कुत्तों के भौंकने की आवाज, तो दूसरी ओर अप्रतिबंधित चिड़ियों की चहचहाहट एक साथ गूंज रही है। मेला के पुराने चिड़िया बाजार में ही यह कुत्ता बाजार लगता है। जब इसका नाम चिड़िया बाजार था, तब भी यहां कुत्ता बिकता था।चिड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध एवं रोकथाम की वजह से अब यह कुत्ता बाजार के नाम से ख्याति अर्जित कर चुका है।
हरिहर क्षेत्र के इस कुत्ता बाजार की खूबी एवं खासियत यही है कि भारी झंझावतों के बीच यह आज भी जीवंत है। सुंदर है, आकर्षक है और मेला दर्शकों की पसंद में शामिल है। समय ने करवट बदला, सरकार की नीतियों में भी परिवर्तन हुआ जिससे चिड़िया बाजार पर इसका गहरा आघात लगा।
कालांतर में हाथी की तरह चिह्नित चिड़ियों की खरीद- बिक्री पर भी रोक लग गई, जिससे इस चिड़िया बाजार में परिवर्तन अवश्यंभावी हो गया। हालांकि यहां आज भी चिड़ियों की चहचहाहट गूंजती है। अप्रतिबंधित एवं पालतू चिड़ियों
को ही यहां बिक्री के लिए लाया जाता है। चिड़िया बाजार से कुत्ता बाजार तक के सफर में मेला दर्शकों की नजर में यह आज भी पहले की तरह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जर्मन शेफर्ड, डोबरमैन, ग्रेडियन सहित उपरोक्त बहुत सारे कुत्ते हैं और उन्हीं के अनुरूप उनका मूल्य भी है। हर जगह उपलब्ध बत्तख, घरेलू हंस, कबूतर आदि की भी बिक्री हो रही है। विलायती चूहा, सफेद खरहा (खरगोश) भी हैं। वास्तविक मूल नस्ल के हंस बिक्री पर प्रतिबंध है। हरिहर क्षेत्र मेला कुत्ता बाजार की बात करें तो वर्षों से यह निजी जमीन में लगती आ रही है और दूरदराज से आने वाले कुत्ता व्यापारी और कोई दूसरी जगह नहीं जाना चाहते। क्योंकि, उन्हें वर्तमान स्थल पर शांति का बोध होता है। वहीं कुत्ता बाजार के मालिक रामजी सिंह का अपनों की तरह उन सबों को संरक्षण प्राप्त होता रहा है। इसलिए कोई भी दूसरी जगह जाने की कल्पना तक नहीं करता। यहां उन्हें सभी सुविधाएं शुरु से मिलती रही है जो कुत्ता व्यवसाय हित में जरूरी होता है।
नन्हा छोटा तोता पक्षी आकर्षण का केंद्र
हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के कुत्ता बाजार में नन्हें पालतू बजरिगर छोटा तोता पक्षी की भी बिक्री हो रही हैं। इस पक्षी को बाजी, शैल तोता, कैनरी तोता, ज़ेबरा तोता, कॉमन पेट तोता, अन्डुलेटेड तोता और हिंदी में बजरी के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका में इसे लिटिल पैराकीट के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा स्लोवाक घरेलू बत्तख भी मेले में मौजूद है। स्लोवाकिया से उत्पन्न होने वाली यह एक घरेलू नस्ल है, जो अब दुनिया भर में उपलब्ध है। इस बाजार में आनेवाले दर्शक न सिर्फ कुत्तों की दुनिया के हमसफर बनते हैं, बल्कि अपने कैमरे में उनकी तस्वीरों को भी कैद करने से नहीं चूकते।
![]()













Leave a Reply