गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिले में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जिले के सभी आठ विधानसभा क्षेत्र में आगामी 6 नवंबर को मत डाले जाएंगे। जिसकी चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है।
ज्ञात हो कि पूरे बिहार में होनेवाला विधानसभा चुनाव महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच ही है, लेकिन वैशाली जिले का परिदृश्य दूसरा है। जिले के कई विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के दल आपस में ही एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। जिससे महा गठबंधन की स्थिति जिले में कमजोर हुई है।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जिले के आठ विधानसभा क्षेत्र राघोपुर, महुआ और महनार से राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, मुकेश रोशन और रामा सिंह की पत्नी विजय हुई थी और राजापाकर सुरक्षित क्षेत्र से कांग्रेस की उम्मीदवार प्रतिमा कुमारी दास विजई हुई। जिले के शेष चार विधानसभा क्षेत्र हाजीपुर, लालगंज, वैशाली और पातेपुर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी विजय हुए थे।
इस वर्ष होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस को जिले के राजा पाकर, लालगंज और वैशाली तीन विधानसभा क्षेत्र मिला। कांग्रेस की ओर से राजापाकर विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक प्रतिमा कुमारी दास को प्रत्याशी घोषित किया गया और दास ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। बावजूद इसके महागठबंधन के घटक दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रत्याशी मोहित पासवान ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया। यहां से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार महेंद्र राम ने अपना नामांकन दाखिल किया है।

वैसे तो राजापाकर क्षेत्र में कुल 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा दास, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन जदयू के प्रत्याशी महेंद्र राम, कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार मोहित पासवान और जनसुराज पार्टी के मुकेश कुमार के बीच है। राजापाकर विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के दोनों घटक दल कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के खड़े हो जाने से कांग्रेस प्रत्याशी की हालत कमजोर हो गयी है। साथ ही जन सुराज के मुकेश कुमार भी पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में डटे हैं।
गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा दास मात्र 1796 वोट से राष्ट्रीय तांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र राम को पराजित कर चुनाव में विजय हुई थी, लेकिन इस बार महागठबंधन के घटक राजद के कार्यकर्ता कांग्रेस प्रत्याशी को छोड़कर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी को मदद कर रहे हैं, जिस वजह से इस क्षेत्र में लड़ाई तिकोनिय हो गई है और जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र राम का पलड़ा सभी प्रत्याशियों पर भारी दिख रहा है।
वैशाली जिला के हद में लालगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस को दूसरा क्षेत्र महागठबंधन की ओर से मिला और महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी आदित्य कुमार उर्फ राजा ने बड़े तामझाम के साथ अपना नामांकन दाखिल किया। इस कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन में कांग्रेस के नेता और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव और बंगाल के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी के अलावे कांग्रेस के अन्य दर्जन भर भी शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन में राज्य के कोई नेता शामिल नहीं हुए और नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन राजा ने राजद ने लालगंज विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और अनु शुक्ला की पुत्री शिवानी शुक्ला को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।
शिवानी शुक्ला ने राजद प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया। लालगंज विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी के नामांकन के बाद कांग्रेस प्रत्याशी जो व्यावसायिक वर्ग से आते हैं चुनाव में अपना नफा नुकसान का आकलन कर अपना नामांकन वापस ले लिया। इस तरह लालगंज विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस बिना लड़े ही हार गई।
कांग्रेस को महागठबंधन की ओर से तीसरी सीट वैशाली विधानसभा दी गई, जहां से कांग्रेस ने इंजीनियर संजीव कुमार को अपना प्रत्याशी घोषित किया। कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में संजीव कुमार ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया। गत विधानसभा चुनाव में संजीव कुमार ने वैशाली विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और मात्र 7413 वोट से जदयू के सिद्धार्थ पटेल से चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार संजीव कुमार वैशाली विधानसभा क्षेत्र में बीते 6 माह से काफी सक्रिय थे और मतदाताओं से अपना संपर्क अभियान जारी रखे हुए थे।
लेकिन नामांकन के अंतिम दिन राजद ने यहां खेल कर दिया और अपना उम्मीदवार अजय कुशवाहा को खड़ा कर लालटेन सिंबल भी दे दिया। इस तरह वैशाली में भी महागठबंधन के दो घटक दल राजद और कांग्रेस आपस में ही लड़ रहे हैं, जिसका फायदा राज जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी सिद्धार्थ पटेल को प्राप्त होगा। चुनाव का वैशाली विधानसभा में जो अभी परिधि से परिदृश्य है उसमें कांग्रेस प्रत्याशी काफी मेहनत के बाद तीसरे स्थान पर पीछड़ते नजर आ रहे हैं और उनके जीत की आशा बहुत कम रह गई है।
इस तरह देखा जाए तो वैशाली जिले में किसी भी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के जीतने की उम्मीद बहुत कम दिख रही है। वैसे भी वैशाली जिला में कांग्रेस का अपना कोई कारगर संगठन नहीं है, और कांग्रेस महागठबंधन के घटक राजद के बैसाखी के सहारे ही चुनाव मैदान में थी। राजद द्वारा अपना उम्मीदवार कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ खड़ा कर दिए जाने के बाद कांग्रेस का जिले में और बुरा हाल होने वाला है। जिले के मतदाताओं का अनुमान है कि इस बार वैशाली जिले से कांग्रेस का डब्बा गोल हो जाएगा।
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