अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने से होती ऐश्वर्य प्राप्ति व समस्त दुखों का निवारण
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के वैष्णव मंदिरों, मठों एवं रहिवासियों के घरों में 25 सितंबर को भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित अनंत चतुर्दशी व्रत की जायेगी। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष भक्तिमय माहौल है। यह व्रत भगवान विष्णु के अनंत और असीम स्वरूप को समर्पित है। इस दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है, जो चौदह लोकों और भगवान के रक्षा-कवच का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि विधिवत व्रत करने से समस्त कष्ट दूर होते हैं और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
भूमि वाराह, अलवार नगरी तमिलनाडु से श्रीगजेंद्र मोक्ष देव स्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने 24 सितंबर को अपने संदेश में कहा है कि भगवान अनंत की छत्रछाया सदैव बाबा हरिहरनाथ की नगरी व भक्तों पर बनी रहेगी। बाबा हरिहरनाथ मंदिर न्यास के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री और पवनजी ओझा ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु और शेषनाग की पूजा से सभी संकटों और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन और गणपति विसर्जन भी होता है, जिससे धार्मिक उल्लास और बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि ‘अनंत’ का अर्थ है जिसका न आदि है न अंत। यह आत्मा के अजर-अमर और अनंत होने का प्रतीक है। यह व्रत सिखाता है कि यह भौतिक दुनिया नश्वर है, केवल परम शक्ति ही शाश्वत है। उन्होंने बताया कि इस व्रत की कथा सुशीला और कौंडिन्य ऋषि से जुड़ी है। प्राचीन काल में धर्मनिष्ठ ब्राह्मण सुमंत ने अपनी पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से किया था। ससुराल जाते समय यमुना तट पर सुशीला ने महिलाओं को अनंत भगवान की पूजा कर 14 गांठों वाला सूत्र बांधते देखा और स्वयं भी व्रत कर सूत्र धारण कर लिया। आश्रम पहुंचने पर ऋषि ने क्रोध में आकर वह सूत्र तोड़कर अग्नि में डाल दिया।
भगवान के अपमान से उनकी सारी सुख-संपत्ति नष्ट हो गई। भूल का अहसास होने पर ऋषि वन में भगवान अनंत की खोज में भटके। कठोर पश्चाताप के बाद भगवान विष्णु ने दर्शन दिए। भगवान की आज्ञा से कौंडिन्य ने 14 वर्षों तक विधिवत अनंत व्रत किया, जिससे उनके सारे कष्ट दूर हुए और पुनः ऐश्वर्य की प्राप्ति हुई। श्रीकृष्ण भगवान की आज्ञा से धर्मराज युधिष्ठिर ने भी भगवान अनंत का व्रत किया, जिससे उनकी महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी।
बाबा हरिहरनाथ मंदिर के नंद बाबा ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान अनंत श्रीहरि विष्णु शेषनाग के साथ अवस्थित हैं और सदैव उनका आशीष भक्तों पर बरसता रहता है। कहा कि यह व्रत भाद्रपद मास के अंत में वर्षा और शरद ऋतु के संधिकाल में आता है। इस दौरान व्रत-उपवास, ध्यान और मंत्रोच्चार से न केवल पाचन तंत्र और रोग-प्रतिरोधक क्षमता संतुलित रहती है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है।
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