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जितिया पर्व से पहले जरूरतमंदों के बीच साड़ी, धोती और गमछा का वितरण

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। वनवासी कल्याण केंद्र बोकारो जिला समिति की ओर से 27 सितंबर को जिला के हद में कसमार प्रखंड के बरई पंचायत अंतर्गत बेमरोटांड़ आदिवासी टोला में वस्त्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जरूरतमंद एवं असहाय महिला-पुरुषों के बीच 100 साड़ी, 50 धोती और 50 गमछा वितरित किए गए। यह वितरण हर वर्ष जितिया पर्व से पूर्व किए जाने वाले सेवा कार्य के तहत किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से वनवासी कल्याण केंद्र बोकारो जिला समिति के संरक्षक रत्नेश्वर प्रसाद, बोकारो महानगर के सदस्य गोपाल दूबे, जिला संगठन मंत्री आलोक कुमार माजी, पेटरवार प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार सिन्हा एवं कामेश्वर ठाकुर आदि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर संरक्षक रत्नेश्वर प्रसाद ने कहा कि वितरित किए जा रहे वस्त्र केवल कपड़े नहीं, बल्कि ग्रामीण एवं आदिवासी समाज के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक कई बुनियादी सुविधाएं देर से पहुंचती हैं, लेकिन वनवासी कल्याण केंद्र का संकल्प है कि समाज का कोई भी जरूरतमंद खुद को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है।

पेटरवार प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार सिन्हा ने रत्नेश्वर प्रसाद के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने सुदूर क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी भाई बहनों की सुध लेकर सेवा का यह पुनीत कार्य किया है। उन्होंने कहा कि वनवासी कल्याण केंद्र केवल एक संगठन नहीं, बल्कि वनवासी समाज के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। केंद्र नगर और वनवासी क्षेत्रों के बीच मजबूत सेतु बनाने का कार्य कर रहा है। जिला संगठन मंत्री आलोक कुमार माजी ने कहा कि आदिवासी संस्कृति देश की समृद्ध विरासत और गौरव है।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाला आदिवासी समाज सादगी एवं स्वाभिमान का प्रतीक है। वस्त्र वितरण कार्यक्रम उनके सम्मान और स्वाभिमान के प्रति समर्पण का छोटा-सा प्रयास है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया और समाज को अधिक सशक्त, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ग्राम समिति अध्यक्ष महावीर मांझी, दुलाली देवी सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।

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