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खतरे में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता, बर्खास्त हो मुख्य चुनाव आयुक्त-महेंद्र पाठक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता खतरे में है, मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त किया जाए। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) झारखंड राज्य परिषद प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने 25 सितंबर को कही।

झारखंड की राजधानी रांची स्थित भाकपा प्रदेश कार्यालय में कहा कि पांच वाम दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल)-लिबरेशन, एआईएफबी और आरएसपी द्वारा जारी संयुक्त बयान का पूर्ण समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि बीते 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित जांच रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, बहाली और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) के फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। कहा कि यह सिर्फ एसआईआर का मामला नहीं है, यह भारत के चुनावी लोकतंत्र और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के मौलिक सिद्धांत पर हमला है।

मतदाता डेटाबेस का केंद्रीकरण और राज्य/निर्वाचन क्षेत्र स्तर के अधिकारियों की पहुंच पर रोक, जैसे गोवा में 97 योग्य मतदाताओं को सॉफ्टवेयर के जरिए रोकना, यह साबित करता है कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र संस्था के रूप में नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के औजार के रूप में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रहते चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कभी इतनी कम नहीं रही। इसलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी झारखंड राज्य परिषद मांग करती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए।

एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए सभी मतदाताओं के मताधिकार को बहाल किया जाए। चुनाव आयोग के स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल किया जाए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की वर्तमान प्रणाली को खत्म कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली चयन समिति की प्रणाली लागू की जाए।

भाकपा राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि झारखंड राज्य परिषद ने निर्णय लिया है कि केंद्रीय आह्वान के अनुसार 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे झारखंड में सप्ताह व्यापी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसमें 28 सितंबर को शहीद-ए-आजम भगत सिंह और 2 अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती है, दोनों ने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए आजीवन संघर्ष किया। इसलिए वे झारखंड के सभी गैर-भाजपा, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और जागरूक जनों से इस लोकतंत्र बचाओ आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हैं।

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