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अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सामूहिक वंदे मातरम् गायन को ले बैठक

प्रहरी संवाददाता/बेरमो (बोकारो)​। बोकारो जिला के हद में अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में 22 सितंबर को नमामि भारतम् के तहत सामूहिक वंदे मातरम् गायन की सफलता को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की गयी।

विद्या भारती द्वारा आयोजित नमामि भारतम् के तहत एक करोड़ जन का सामूहिक वन्दे मातरम गायन कार्यक्रम आगामी 25 सितंबर को प्रात: 11 बजे होना तय है। इसकी सफलता को लेकर विद्यालय अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में उक्त विशेष बैठक का आयोजन किया गया।

​कार्यक्रम का शुभारंभ सभी मुख्य अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा उपरोक्त दीप मंत्र एवं वंदना के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य सुधीर कुमार सिंह द्वारा किया गया। बैठक में अधिकारी, समिति सदस्य एवं प्रधानाचार्यगण उपस्थित रहे।


बैठक में विद्यालय प्रबंध समिति के अमित कुमार सिंह (सचिव, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर), राम नरेश द्विवेदी (उपाध्यक्ष, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर)​, धीरज कुमार पांडेय (संकुल संयोजक सह सचिव, कस्तूरबा श्रीविद्या निकेतन), दीपक अग्रवाल (कोषाध्यक्ष, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर), जवाहर लाल यादव (सह सचिव, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर)​, रीमा देवी (समिति सदस्य, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर)​, अर्चना सिंह (सह सचिव, ढोरी विद्या मंदिर), सुमित बंसल (सचिव, ढोरी विद्या मंदिर)​, राम निवास तिवारी (सचिव, संडे बाजार विद्या मंदिर), संजय कुमार पांडेय (अध्यक्ष, संडे बाजार विद्या मंदिर), भास्कर अग्रवाल (सचिव, टुपकाडीह विद्या मंदिर)​, छेदी नोनिया (सचिव, मकोली विद्यालय)​, रुदेश्वर शर्मा (सचिव, अंगवाली)​, अरविन्द कुमार शर्मा (समिति सदस्य, संडे बाजार विद्या मंदिर)​।

संकुल के प्रधानाचार्यगण यथा सुधीर कुमार सिंह (प्रधानाचार्य, अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, फुसरो),​ रूमी सरकार (प्रधानाचार्या, कस्तूरबा श्री विद्या निकेतन, ढोरी),​ परमानंद सिंह (प्रधानाचार्य, ढोरी विद्या मंदिर)​, गणेश कुमार पाल (प्रधानाचार्य, मकोली विद्या मंदिर), ​युगल कुमार महतो (प्रधानाचार्य, अंगवाली विद्या मंदिर),
​लक्ष्मण ठाकुर (प्रधानाचार्य, संडे बाजार विद्या मंदिर), मंटू कुमार गिरि (प्रधानाचार्य, तुपकाडीह विद्या मंदिर), ​सुभाष कुमार झा (प्रधानाचार्य, जरीडीह बाजार विद्या मंदिर), ​राम पुकार राम (प्रधानाचार्य, चलकरी बस्ती विद्या मंदिर), ​महेश कुमार रजवार (प्रधानाचार्य, पिछड़ी विद्या मंदिर) आदि उपस्थित थे।

​ मौके पर मुख्य अतिथि डॉ ब्रजेश कुमार ने अपने संबोधन में प्रेरणादायी और विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नमामि भारतम् केवल एक सामान्य या औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और जन-जागरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण महा अभियान है। कहा कि जब इस राष्ट्रव्यापी आयोजन के तहत एक साथ एक करोड़ देशवासी पूरे उत्साह और तन्मयता के साथ वन्दे मातरम का गान करेंगे, तो वह क्षण हमारी अटूट सांस्कृतिक एकता, राष्ट्र प्रेम और सामूहिक शक्ति का एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उदाहरण बनेगा, जो देश-दुनिया में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगा।

​उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज की युवा पीढ़ी, छात्र-छात्राओं और नौनिहालों के भीतर राष्ट्रधर्म, स्वदेशी बोध और मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम की भावना को प्रबल रूप से स्थापित करने के लिए ऐसे आयोजनों की अति आवश्यकता है। कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कारित समाज के निर्माण में इस प्रकार के राष्ट्रीय उत्सव रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं।

विशिष्ट अतिथि दिलीप पाहन ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा करते हुए कहा कि इस अभियान से समाज के अंतिम पायदान तक के आमजनों को जोड़ना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सभी से अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करने का आग्रह किया। ​डॉ ब्रजेश कुमार ने उपस्थित कार्यकर्ताओं, प्रबंध समिति के सदस्यों, संकुल के प्रधानाचार्यों और आचार्यों से पुरजोर आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा, सामर्थ्य और समर्पण भाव से जुट जाएं। उन्होंने नगर से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचल तक घर-घर जाकर जन-संवाद स्थापित करने, विभिन्न विद्यालयों के माध्यम से अभिभावकों और प्रबुद्ध जनों को जागरूक करने तथा समाज के हर वर्ग को इस राष्ट्रभक्ति के पावन महायज्ञ से जोड़ने की पुरजोर अपील की।

​कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन कस्तूरबा संकुल के संयोजक धीरज कुमार पांडेय द्वारा किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम का समापन सामूहिक वंदे मातरम् के गायन के साथ संपन्न हो गया। पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के सभी आचार्य-दीदीजी एवं कर्मचारी बंधु-भगिनी का अहम योगदान रहा।

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