संतान को खोने का दर्द, दुःख को शब्दों से नहीं, दिल से महसूस कर रहा हूँ-नायक
प्रहरी संवाददाता/रांची (झारखंड)। झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री तृषा सिंह के असामयिक निधन ने मेरे अपने जख्म फिर हरे कर दिए है। एक पिता होने के नाते मंत्री के दुःख को महसूस कर रहा हूँ। उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 24 सितंबर को कही।
नायक ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री तृषा सिंह की सड़क दुर्घटना में हुए असामयिक निधन की हृदयविदारक खबर से मैं स्तब्ध और अत्यंत मर्माहत हूं। इतनी कम उम्र में एक बेटी का इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना किसी भी माता-पिता के लिए ऐसा दुःख है, जिसे शब्दों में बयान करना संभव नहीं।
उन्होंने कहा कि मैं स्वयं अपनी बेटी विजयश्री नायक को असमय खोने का असहनीय दर्द झेल चुका हूं। कहा कि बीते 19 सितंबर को उनकी बेटी के निधन ने उनके जीवन में जो गहरा खालीपन पैदा किया है, उसे मैं आज भी महसूस कर रहा हूं। इसलिए तृषा के निधन की खबर ने मेरे उस दर्द को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
नायक ने कहा कि मैं उस पीड़ा को महसूस कर सकता हूं, जब घर में बेटी की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाए, उसकी हंसी केवल यादों में रह जाए और माता-पिता की आंखें उसे तलाशती रह जाएं। बेटी की अर्थी को कंधा देने का दर्द किसी भी माता-पिता के लिए जीवन का सबसे कठिन क्षण होता है। इस पीड़ा के सामने बड़े से बड़ा शब्द भी छोटा पड़ जाता है।
उन्होंने कहा कि इस अत्यंत दुःखद घड़ी में मैं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह एवं उनके पूरे परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और आत्मीय शोक प्रकट करता हूं। कहा कि एक बेटी को खोने के इस असहनीय दुःख में मैं स्वयं को उनके परिवार के साथ खड़ा पाता हूं। ईश्वर दिवंगत तृषा की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनकी मां, पिता और परिवार के सभी सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें। कहा कि आज एक मां ने अपनी बेटी खोई है और एक पिता ने अपनी बेटी खोने का दर्द फिर महसूस किया है।
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