महावीर स्थान में भव्य रूप से मनेगा गुरु पर्व महोत्सव
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर की पावन भूमि पर अवस्थित लोक सेवा आश्रम के व्यवस्थापक सह उदासीन महामंडल प्रबंध समिति बिहार के ख्याति प्राप्त अध्यक्ष संत विष्णुदास उदासीन (मौनी बाबा) के नेतृत्व में 360 वर्षों से चले आ रहे गुरु पर्व महोत्सव की तैयारियां बिहार की राजधानी पटना सिटी के चैनपुरा महावीर स्थान में अंतिम चरण में हैं।
जानकारी के अनुसार इस वर्ष यह आयोजन पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक भव्य और धूमधाम से संपन्न होगा। इस पुनीत कार्य में पटना सिटी रहिवासी हरिमोहन यादव और नित्यानंद सिंह तन-मन से सक्रिय रूप से जुटे हैं।
कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए मौनी बाबा ने 2 अक्टूबर को बताया कि परम पूज्य संत शिरोमणि श्रीश्री 1008 वैकुंठवासी बाबा गंगादासजी द्वारा शुरू किए गए इस गुरु पर्व को उनकी परंपरा के अनुसार ही आगे बढ़ाया जा रहा है।
वैरागी बाबा ज्ञानदासजी की गुरु-शिष्य परंपरा में वैकुंठवासी बाबा शुकदेव दासजी, वैकुंठवासी बाबा राम शरण दासजी, वैकुंठवासी बाबा रामदास उदासीन और वैकुंठवासी बाबा श्यामदासजी उदासीन द्वारा इसे अनवरत रूप से संचालित किया गया है। इस महोत्सव में बिहार के विभिन्न हिस्सों से संत-महात्माओं सहित हजारों भक्त भाग लेंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे।
इसके साथ ही राज्यभर के लोकप्रिय समाचार पत्रों के संपादक, पत्रकार, साहित्यकार, कवि, समीक्षक, कहानीकार तथा विभिन्न धर्मों व संगठनों से जुड़े गणमान्य भी इसमें सम्मिलित होंगे। सोनपुर से भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। संत मौनी बाबा ने बताया कि पटना सिटी का चैनपुरा महावीर स्थान संभवतः बिहार का एकमात्र ऐसा आश्रम है, जहां लगभग 360 वर्षों से नौ ग्रहों के प्रतीक के रूप में नौ दीप निरंतर दिन-रात प्रज्वलित होते रहते हैं। इस विशेष व्यवस्था के लिए एक मठ प्रतिनिधि और एक स्थायी पुजारी नियुक्त हैं, जो मंदिर की देखरेख व पूजा-पाठ संभालते हैं।
बताया जाता है कि शासकीय मुहूर्तों और दिशाओं के अनुसार इन दीपों की स्थिति में बदलाव किया जाता है। माह में एक बार और वर्ष में 12 बार शुद्ध तेल की व्यवस्था की जाती है, जो आश्रम के प्रेमी भक्तों के सहयोग से सुचारू रूप से चल रही है। यहां की पवित्रता और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस आश्रम की परंपरा श्रीचंद्र महाराज से जुड़ी है, जिन्हें शिव का अवतार माना जाता है।
चैनपुरा महावीर स्थान से गुरु संगत साहेब, नारायण दास, निहाल दास, चीरा दास, मेहर दास, मेला राम, तोता राम, मोहन दास, महातेजस्वी योगीराज 1008 गंगा दास, संत रामचरण दास और संत रामदास उदासीन से होते हुए वर्तमान में 12वें दशक तक संत शिरोमणि विष्णुदास उदासीन (मौनी बाबा) इसकी देखरेख कर रहे हैं। इस आश्रम के अधीन वैशाली जिला के हद में लालगंज, बिहार के जहानाबाद, विंगवा, डोरीगंज, मधौल (मुजफ्फरपुर यमुनिया), रक्सौल और झारखंड की राजधानी रांची के दरिया सहित 20 से अधिक मठियां हैं। विशेष अवसरों पर इन सभी स्थानों से भक्तों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है।
मौनी बाबा ऐतिहासिक संदर्भों को याद करते हुए बताते हैं कि मुग़ल सम्राट जहाँगीर ने श्रीचंद्र महाराज के चरणों में सपरिवार नतमस्तक होकर 700 बीघा जमीन दान दी थी। वर्तमान में मौनी बाबा आगामी 5 अक्टूबर को होने वाले इस भव्य कार्यक्रम की सफलता के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।
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