राधा जन्म नहीं तो व्रजमंडल व् श्रीकृष्ण अवतार की कल्पना असंभव-लक्ष्मणाचार्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में 19 सितंबर भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा जयंती पारंपरिक विधि-विधान के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक मनाई गई।
इस पावन अवसर पर श्रीराधा रानी का दिव्यौषधियों से महाभिषेक किया गया तथा षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। पूजन के पश्चात प्रसाद वितरण एवं दिव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने राधाष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जगत के कल्याण के लिए वृषभानु नंदिनी श्रीराधाजी का अवतार हुआ। उन्होंने कहा कि भादो मास में भगवान श्रीकृष्ण, भ्राता बलभद्र (बलरामजी), भगवान हयग्रीव और भगवान वामन का अवतार हुआ है। सभी मासों में भाद्रपद मास श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि यदि मानव जीवन से इस महीने को हटा दिया जाए तो जीवन शुष्क और दिशाहीन हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि राधाजी का जन्म नहीं होता तो व्रजमंडल की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी और न ही श्रीकृष्ण का अवतार होता। राधाजी साक्षात पराम्बिका भगवती महालक्ष्मी हैं। इस अवसर पर दिलीप झा, भोला सिंह, फूल झा, निर्मला देवी, अशोक स्वर्णकार, गायक व्रज नंदन, राम नारायणी, रामानुज दासी, हरिओम सिंह सहित अनेक श्रद्धालुजन उपस्थित थे। वहीं 20 सितंबर को श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम सोनपुर से लगभग 101 श्रद्धालुओं का जत्था श्रीरामानुज यात्रा के लिए दक्षिण भारत के रामेश्वरम धाम के लिए रवाना होगा।
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