लागत से कम दूध की कीमत मिलने से पशुपालक भी परेशान-ब्रहमदेव
एस.पी.सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों द्वारा 22 मई को समस्तीपुर के मोतीपुर वार्ड-10 में एकदिनी धरना दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जिले के किसान शामिल हुए।
मौके पर उपस्थित अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रहमदेव प्रसाद सिंह (Director Brahamdev Prasad singh) ने कहा कि लॉकडाउन के कारण सब्जी व फल उत्पादक किसान बर्बाद हो गए हैं। हालत यह है कि टमाटर, भिंडी 2 रुपए किलो सहित अन्य साग-सब्जी भी उन्हें कौड़ी के मोल बेचनी पड़ रही है। खीरा, तरबुज, लालमी आदि फल भी कोई खरीदने वाला नहीं है। कर्ज लेकर फसल उगाने वाले किसानों की तो और भी बुरी हालत है। लागत और मुनाफा की बात छोड़ ही दें, सब्जी तोड़ने और उसे मंडी तक पहुंचाने की मजदूरी नहीं निकल पा रही है। दूध की कीमत नहीं मिलने से पशुपालक किसान भी परेशान है। सरकार से वे मांग करते हैं कि सभी सब्जी-फल उत्पादक किसानों को फसल क्षति का मुआइना करके तत्काल, फसल क्षति मुआवजा देने, केसीसी समेत अन्य सभी लोन माफ करने, रासायनिक खादों की कीमत घटाने, गेहूँ-मक्का खरीद की गारंटी करने की मांग की। स्थानीय मोतीपुर वार्ड-10 में सब्जी उत्पादक किसानों के एकदिनी धरना को बतौर अध्यक्ष ब्रहमदेव प्रसाद सिंह संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर बासुदेव राय, शंकर सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, संजय शर्मा, मोती लाल सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, अनील कुमार राय, ललन दास समेत अन्य किसान धरना में शामिल थे।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के तमाम दावों के विपरीत गेहूं खरीद की हालत भी बुरी है। सरकारी दर (1975 रू प्रति क्विंटल) पर कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हो रही है। व्यापारी किसानों को लूटने में लगे हुए हैं। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (1850) पर खरीद की घोषणा के बावजूद कहीं क्रय केंद्र नहीं खुला है। सरकार ने इस बार दाल और चना खरीदने की भी घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कहीं आरंभ नहीं हो सका है। निजी व्यापारी छोटा मसूर 7000 रू तो चना 6500 रू प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं। सरकार ने इसकी कीमत महज 5100 रू प्रति क्विंटल तय की है। ऐसी स्थिति में कोई किसान आखिर क्यों अपना दलहन सरकार को बेचने जायेंगे? जाहिर है कि इसमें सरकारी खरीद प्रणाली को खत्म करने की ही मंशा झलकती है।
मौके पर जानकारी देते हुए भाकपा माले समस्तीपुर जिला स्थायी समिति सदस्य एवं ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि यदि किसानों की मांग नहीं मानी जाती है तो लॉकडाउन बाद बड़ी गोलबंदी के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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