
प्रहरी संवाददाता (झारखंड)। धनबाद जिला के हद में राजगंज थाना प्रभारी वर्ष 2018 बैच की दरोगा अलीशा कुमारी की कुर्सी खतरे में पर गई है। कभी भी उनकी थानेदारी जा सकती है। आरोप है कि उनपर फर्जी दस्तावेज पर प्रमाण पत्र हासिल करने का मुक़दमा भी हो सकता है। उनका पिछड़ा वर्ग जाति का प्रमाण पत्र रद्द होगा।
अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से सम्बद्ध जाति छानबीन समिति ने इस बाबत एक पत्र जारी किया है। मामले की छानबीन में पता चला है कि अलीशा झारखंड की रहिवासी नहीं है। वह बिहार के नवादा की रहने वाली बतायी जा रही है।
जांच के बाद एक्शन की तलवार राजगंज थाना प्रभारी अलीशा पर लटक गई है। इस मामले में बोकारो के रहिवासी प्रदीप कुमार राय ने वर्ष 2023 में शिकायत की थी कि अलीशा का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है। तब वे हजारीबाग में महिला थाना प्रभारी के पद पर थी। शिकायत के आलोक में तत्कालीन हजारीबाग एसपी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इधर जांच के बाद अंचल अधिकारी डुमरी द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
अलीशा का दावा है कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उनका दावा है कि प्रमाण पत्र सही है। प्रदीप का आरोप था कि अलीशा ने झारखंड में बनिया जाति का प्रमाण पत्र दिखाकर पुलिस में नियुक्ति पाई है। आरोप को लेकर समिति ने जांच कराई, उसके बाद यह खुलासा हुआ है। अब देखना है कि इस मामले में आगे क्या होता है। बताया जाता है कि बीते 25 अप्रैल की बैठक में शिकायतकर्ता प्रदीप और अलीशा ने अपना-अपना पक्ष रखा था। 23 मई की बैठक में अलीशा और उनके पक्ष के दस्तावेजों व मौखिक उत्तर की समीक्षा की गई, जबकि 2 जुलाई को संपन्न बैठक में केवल प्रदीप उपस्थित थे।
विजिलेंस सेल एवं अंचल अधिकारी डुमरी के जांच प्रतिवेदन और पक्षों को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि अलीशा द्वारा जाति प्रमाण पत्र के लिए दिए गए शपथ पत्र व दस्तावेज में कई विसंगतियां थी। इस आधार पर समिति ने अलीशा का पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने का निर्णय लिया है। शिकायतकर्ता ने अलीशा द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र के सहारे आरक्षण का लाभ लेने का आरोप लगाया था।
ज्ञात हो कि, प्रमाण पत्र अलीशा कुमारी को गिरिडीह जिला के हद में अनुमंडल पदाधिकारी डुमरी द्वारा निर्गत किया गया था। इसमें उन्हें बनिया (पिछड़ा वर्ग-2) के रूप में दर्शाया गया था, जबकि जांच में सामने आया कि अलीशा का परिवार जिला के हद में डुमरी प्रखंड के जामताड़ा पंचायत का स्थायी रहिवासी नहीं है। जांच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि अलीशा के पिता ने वर्ष 1986 में जामताड़ा क्षेत्र में जमीन खरीदी थी, जिस पर दस वर्ष पूर्व मकान बना और उसे किराए पर दे दिया गया। आरोप है कि, अलीशा का परिवार खुद उस स्थान पर कभी स्थायी रूप से नहीं रहा है। जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने के लिए अलीशा द्वारा स्वघोषित शपथ-पत्र और पुराने दस्तावेजों का सहारा लिया गया था, जिन्हें सत्यापित करने के बाद समिति ने प्रमाण पत्र को अमान्य पाया है।
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