एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना की सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा 9 से 12 अक्टूबर तक प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से शेखपुरा जिला के हद में बरबीघा के बेलाव में 4 दिवसीय दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
लोकपंच के सचिव सह प्रसिद्ध रंगकर्मी मनीष महीवाल के अनुसार यहां पटना की अन्य संस्थाएं केवल पटना शहर में ही नाटकों का प्रदर्शन करती हैं, वही लोक पंच द्वारा विगत 8 वर्षों से बिहार के विभिन्न जिलों के ग्रामों में नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नाट्य कला उन जगहों तक पहुंच सके, जहाँ के रहिवासी इससे परिचित नहीं है। महीवाल ने बताया कि दशरथ मांझी नाट्य महोत्सव के पहले दिन 9 अक्टूबर को प्रयत्नम संस्था द्वारा प्रस्तुत तथा गौरव कुमार द्वारा निर्देशित नाटक कलयुग का पंच की प्रस्तुति की गयी।
इस नाटक की शुरुआत एक पंचायत से होती है। जहां रामधनी नाम के गरीब किसान पर अपनी पुरानी खूनस को निकलने के लिए सेठ धनपत लाल अपने खेत में रामधनी के जानवर द्वारा फसल नष्ट करने का आरोप लगाकर सेठ पंच से मिलकर उसे आरोपी साबित कर देता है और दंड स्वरूप उसे लाठी मार–मार कर मार डालता है। बाद में रामधनी की बेटी के साथ सेठ धनपतलाल का छोटा बेटा जयंत का प्रेम हो जाता है।
दरअसल जयंत प्रेम के नाम पर रामधनी की पुत्री के साथ छलावा करता है। रामधनी की बेटी का नाम अंकुश है। जयंत और अंकुश दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते है। जयंत उसे प्रेम का ढोंग कर गर्भवती कर देता है। जब यह बात अंकुश के घर में पता चलती है तब अंकुश का बड़ा भाई विक्की पहले तो गुस्से से आग बबूला हो जाता है। फिर कुछ ही देर बाद वह अपनी बहन की शादी का प्रस्ताव लेकर जयंत के घर जाता है।
पर जयंत शादी करने से साफ़ इनकार कर देता है और विक्की को मारपीट कर भगा देता है। बाद में सेठ के कुछ गुंडे और उसका छोटा बेटा जयंत मिलकर लड़की को मारने की कोशिश करता है। इसी बीच किसी तरह अंकुश बचकर जयंत का चाकू उसी के गर्दन पर मारकर जयंत की हत्या कर देती है। यह देख सेठ का आदमी अंकुश को भी मार देता है। यह खबर जैसे ही अंकुश का भाई सुनता है तो वह दौड़कर अंकुश के पास पहुंचता है।

जब अंकुश का भाई वहां पहुंचता है तो सेठ धनपतलाल उसे उसकी बहन और अपने बेटे की हत्या का आरोप लगा देता है। विक्की को पुलिस से जान बचाकर भागना पड़ता है। लेकिन फिर एक दिन बदला लेने के लिए छिपते छिपाते विक्की आता है, फिर सेठ धनपतलाल और पंच की हत्या कर देता है। अंत में पुलिस आती है और कानून के हिसाब से न्याय किया जाता है।
नाटक के मंच पर कलाकार चंदन सिंह, दीपक पांडेय, महेंद्र साव, सुरेंद्र प्रसाद, विकास कुमार, अंकित, शिवम पांडेय, आशुतोष कुमार ने अपने किरदारों को जीवंत कर दिया है। जबकि मंच से परे नैपथ्य में प्रकाश अमित कुमार, सेट डिजाइन रौनक कुमार, वस्त्र विन्यास प्रियांशु राज, ढोलक राम अयोध्या द्वारा नाटक में अहम भूमिका का निर्वाह किया है।
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