प्रहरी संवाददाता/गिरिडीह (झारखंड)। एक और झारखंड के प्रवासी मजदूर की मौत। प्रवासी मजदूरों के मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।
जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिला के हद में जमुआ थाना क्षेत्र के परमानीडीह के मजदूर रज्जाक अंसारी की 5 अक्टूबर की सुबह सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी। बताया जाता है कि परमानीडीह निवासी स्वर्गीय उस्मान अंसारी के 35 वर्षीय पुत्र रज्जाक अंसारी की छतीसगढ़ में सड़क हादसे में मौत हो गयी। रज्जाक के मौत की सूचना मिलते ही परिजनो का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गांव में शोक का माहौल हैं।
बताया जाता है कि मृतक छत्तीसगढ में टाइल्स-मार्बल लगाने का काम करता था। वह 5 अक्टूबर की सुबह अपने बाइक से बाजार जा रहा था, तभी खड़ी वाहन में असंतुलित होकर टक्कर मारने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी।
मृतक रज्जाक अंसारी अपने पीछे पत्नी रेहाना खातून, पुत्री गुलाबशा खातून(12 वर्ष), पुत्र साकिब अंसारी(08 वर्ष) और छः साल की जुड़वा पुत्री पकीजा खातून एवं साहीन खातून को रोता बिलखता छोड़ गया।

इस घटना को लेकर प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि झारखंड के नौजवानों का मौत के मुंह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं है।इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी की तलाश में परदेस गये प्रवासी झारखंडी मजदूरों के मौत का सिलसिला जारी है।
हर रोज झारखंड के किसी न किसी इलाके से प्रवासी मजदूर की दूसरे राज्यों या विदेश में मौत की खबरें आ रही है। अली के अनुसार प्रवासी मजदूरों की सबसे ज्यादा तादाद झारखंड के गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिले से रोजी कमाने गये रहिवासियों की है।
अपना घर छोड़कर परदेस गये इन मजदूरों की जिंदगी तो कष्ट में बीतती ही है, मौत के बाद भी उनकी रूह को चैन नसीब नहीं होता है। किसी की लाश हफ्ते भर बाद आती है, तो किसी को ढाई से तीन महीने भी लग जाते हैं। ऐसे में राज्य सरकार को रोज़गार की ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि मजदूरो के पलायन को कारगर तरीके से रोका जा सके।
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