हीरा लाल का मिलनसार व्यक्तित्व किसी चमकते हीरे से कम नहीं
सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। कला किसी का मोहताज नहीं होता है। वह हीरा के समान जहाँ भी रहता है वही अपनी चमक बिखेरता रहता है। इसी तरह का हीरा रूपी कलाकार हैं हीरालाल प्रजापति।
पैदाइशी मूर्ति बनाने की रुचि एवं शौक रखने वाले पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum district) के हद में बड़ाजामदा निवासी हीरालाल प्रजापति ने 11 जून को एक भेंट में बताया कि इस तरह की कला से उन्हें अपार आनंद मिलता है।
माता दुर्गा, लक्ष्मी एवं गणेश कि उनकी बनाई हुई मूर्तियां जिला के हद में बड़ाजामदा, गुआ, नोआमुंडी एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों के बीच मांग की जाती है। मिट्टी के बर्तन में हांडी कलश व दीप उनके आवास क्षेत्र में उनके द्वारा सेवारत कर्मियों के साथ साथ बनाया जाता है।
अपने आप को जन्म- मृत्यु के संरचना के बीच मिट्टी के सामानों की उपलब्धता वे लोगों को निःशुल्क कराते हैं। विजया रन टू उषा मार्टिन कंपनी में अपने उत्कृष्ट सेवा वर्ष 2004 में 2020 पूरे निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक दे चुके है। उन्होने कड़ी मेहनत कर स्नातक तक की पढ़ाई की है।
ज्ञान को ही सफलता का रहस्य मानने वाले समाजसेवी हीरालाल प्रजापति का मानना है कि झारखंड की अपेक्षा उड़ीसा में ट्रांसपोर्टिंग का कार्य बहुत तेजी से चल रही है । अतः वहां रोजगार की संभावनाएं ज्यादा देखी जा रही है। हीरालाल ने बताया कि उन्होंने टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्टस लिमिटेड कंपनी में भी अपनी सेवा बीते दो साल पूर्व दे चुके हैं।
बुनियादी तौर पर कड़ी मेहनत से जीवन में सफलता की मंजिल हासिल करने वाले हीरा लाल का कहना है कि एक सामान्य व्यक्ति के रूप में गाड़ियों को बनाने वाले मिस्त्री का काम करने से ट्रक-बस ड्राइवर चलाने का काम भी पूरी इमानदारी पूर्वक कर चुके है। वे किसी भी काम को छोटा ना समझने वाले हैं।
काम के प्रति विशेष लगाव रखकर, उसे जीवन की बुनियादी सफलता का आधार मानने वाले हीरालाल को एक सफल व्यवसायी कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
हीरालाल का मानना है कि तकदीर के साथ- साथ इच्छा शक्ति मनुष्य की सफलता का मुख्य आधार होता है। काम में बाधा व अवरोध उत्पन्न करने वालो के प्रति उनका कहना है कि, ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती है, लेकिन असर जरूर होता है। प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा समय कल्याणकारी कार्यों के साथ जनहित में लगाना चाहिए।
हीरा लाल प्रजापति के अच्छे व्यवहार एवं स्वभाव को देखते हुए बड़ाजामदा क्षेत्र में बनने वाले दुर्गा पूजा पंडाल के मूर्ति के फाइनल फिनिशिंग के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाता है। मां दुर्गा के पंडाल की माता दुर्गा की मूर्तियों को तराशने का कार्य निःशुल्क सेवा एवं पूरे श्रद्धा से साथ हीरालाल को करते देखा जा सकता है।
अपनी सफलता व जीवन में बढ़ते हुए ऊंचाइयों का श्रेय अपने पिता स्वर्गीय बद्रीराम प्रजापति को देते हुए उनके दिशा निर्देशन में समाज कल्याण एवं समाज के विकास को अपने जीवन का लक्ष्य मानते हैं ।
हीरालाल प्रजापति ने बताया कि वर्ष 1991 में उन्हें बड़ाजामदा सेंट्रल हॉस्पिटल के द्वारा स्थाई रूप से ड्राइवर की नौकरी मिल गई थी। लेकिन इन्हें नौकरी प्राप्त कर नौकर बनने के बजाय लोगों को रोजगार देने, उनके भविष्य को संभालना तकदीर में कहीं न कहीं लिखा हुआ था। इनका मानना है कि खुद के रोजगार पाने से कहीं ज्यादा बेहतर है कि कईयों को रोजगार प्रदान करें।
इनके प्रयास से दर्जनों हाथों को नियुक्ति मिली हुई है। जिससे इन्हे आत्मिक संतोष मिलता है। सच्चाई यह है कि अपने यहाँ काम करने वाले लोगों के साथ मालिक होते हुए भी हीरा लाल को बेझिजक मजदूर बनकर काम करते हुए देखा जा सकता है।
श्रम शक्ति को ही मानव शक्ति मानने वाले हीरा लाल उन्हें अपने परिवार का हिस्सा से कम नहीं मानते है। रहिवासियों के अनुसार हीरा लाल का मिलनसार व्यक्तित्व किसी चमकते हुए हीरे से कम नहीं है। बड़ाजामदा के साथ-साथ नोआमुंडी प्रखंड व उड़ीसा के कई जिले के लोगों के दिलों में हीरालाल एक हीरे की तरह जगमगाते हुए दिखाई देते हैं।
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