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लोकगायिका रानी की गायिकी ने मेला के मंच पर बिखेरी लोकगीतों की सोंधी महक

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से कार्यक्रम आयोजित

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के पर्यटन विभाग के मुख्य मंच पर बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में 8 दिसंबर की शाम बिहार की सुप्रसिद्ध लोक गायिका रानी सिंह के लोकगीतों की सोंधी महक से मेला पंडाल का माहौल खुशनुमा हो गया।

बिहार के नालंदा जिला की बेटी लोकायिका रानी सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत गांव की मिट्टी का रंग बिखड़ते हुए श्रद्धांजलि स्वरुप स्वर कोकिला स्व.शारदा सिन्हा को समर्पित मैथिली शिव भजन जनक किशोरी भेलथिन हमरी बहिनिया हे मिथला के नाते की प्रस्तुति की। उसके बाद उन्होंने पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत के दौर में सोनपुर के मेलवा में पियवा हेराईल गाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस गीत के बाद गायिका रानी ने भोजपुरी विरह गीत लड़कैयां नादान, ना जा बलम परदेशवा गाकर पूरे माहौल को गुंजायमान कर दिया।

गायिका रानी सिंह ने पूर्वी धुन के जनक पंडित महेंद्र मिश्र की रचना अंगुली में डसले बिया नगीनिया हे ननदी एवं मगही लोकगीत पिपरा के पतवा फुलुंगिया डोले गाकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। अंत में उन्होंने चर्चित गीत सजन राजधानी पकड़ के आ जईह गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। दइन के साथ नाल पर बिहार के जाने माने नाल वादक पंडित अर्जुन कुमार चौधरी, हारमोनियम पर बृज बिहारी मिश्रा, बैंजो पर रविंदर कुमार एवं पैड पर सुरेश कुमार ने संगत कर शुरु से अंत तक कार्यक्रम में झंकार बनाये रखा।

गौरतलब है कि लोक गायिका रानी सिंह पूरे देश भर में अपने गीतों से बिहार का नाम रोशन कर रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से संगीत से स्नातक करने के बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ पंजाब भटिंडा से संगीत विद्या से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने बिहार एवं देश भर के विभिन्न मंचों पर अपने गायन की की प्रस्तुति कर चुकी है।

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