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धर्म-क्षेत्र अंगवाली में सष्टम दिवस मानस महायज्ञ में उमड़ी भीड़

मानस महायज्ञ में दिव्यांग कल्याण ट्रस्ट ने दिया सेवा 

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली के मैथान टुंगरी में आयोजित श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के छठे दिवस 24 मार्च को प्रातः से दोपहर तक आयोजन स्थल की परिक्रमा करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।

इस दौरान पंडाल में बैठे दर्जनों रामायण पाठ करने वालो को व्यास मंच पर विराजमान आचार्य अनिल पाठक अपने सहयोगियों अमित पाठक, अशोक मिश्र, बलदेव शरण आदि के साथ धाराप्रवाह व लयबद्ध मानस पाठ करा रहे थे। इस क्रम में अंगवाली में संचालित शिक्षा निसहाय दिव्यांग कल्याण ट्रस्ट की ओर से अध्यक्ष अजीत रविदास द्वारा व्यासजी एवं टीम, सभी पुजारी को भगवा वस्त्र से सम्मानित किया गया। साथ हीं उन्हें फलाहार प्रदान किया गया।

बताया जाता है कि दिव्यांग कल्याण ट्रस्ट के अंजू देवी ने अकेले दस भगुआ वस्त्र मुहैया कराया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष रामविलास रजवार, भगवान दास, पवन कमार, बरूण, मुखिया धर्मेंद्र कपरदार, डॉ विश्वास भी उपस्थित थे। रात्रि प्रवचन के अनुसार प्रभु श्रीराम का सीता एवं लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में आगमन हुआ।

इस प्रसंग पर अयोध्या धाम से पधारी हुईं मानस मंजरी शांति श्रेया ने ठहराव आवास में एक औपचारिक वार्ता के दौरान बताया कि इंद्रदेव के पुत्र जयंत ने पिता से पूछा कि देवलोक बिल्कुल सुनासुना सा लग रहा है। देवराज इंद्र ने बताया कि प्रभु श्रीराम के रूप में धरती में जन्म लिए है, जो इस वक्त पत्नी व भाई के साथ चित्रकूट के वन में हैं।स्पष्ट किया कि जयंत वहां जाकर देखा जो दृश्य उसके मन में मानव रूपी श्रीराम के प्रति भ्रम हो गया।

इसी भ्रम को तोड़ने के उद्देश्य से कौवे के वेश में सीता के पांव में चोंच मारा, जिससे रक्त प्रवाहित होने लगा। जब प्रभु ने एक तिनके को उसकी ओर फेंका, वह प्राण बचाने हर ओर दौड़ा, फरियाद लगाई। किसी ने मदद नहीं की। उसे प्रभु के शरण में ही जाने की सलाह दी। अंत में प्रभु श्रीराम ने कौवे की एक आंख फोड़कर जीवन दान दिया। इस तरह उसे परम सत्ता के अवतरण की शंका मिटा। इस अवसर पर यज्ञ स्थल पर मिर्जापुर के धर्मराज शास्त्री, विंध्याचल के इंद्रेश शास्त्री ने भी कई प्रसंगों पर चर्चा की।

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