अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के प्रसिद्ध पहलेजा घाट धाम पर 7 जुलाई को हजारों कांवरियां तीर्थयात्रियों ने दक्षिणी वाहिनी गंगा नदी की पवित्र जलधारा में डुबकी लगायी। शिव-गंगा धाम में तब्दील पहलेजा धाम भोले नाथ शिव और देवी गंगा के सुयश गान से गूंज रहा है।
बिहार के बंटवारे के बाद वैद्यनाथ धाम झारखंड राज्य में चला गया। तब से पहलेजा मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ कांवर यात्रा का शुमार बिहार के सबसे बड़े कांवर यात्रा के रूप में होने लगा है। हालांकि बिहार के इस कांवर यात्रा को सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए राज्य सरकार ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया हैं।
पहलेजा घाट रेलवे प्लेटफार्म भले ही जर्जर, ध्वस्त व विरानगी का शिकार है, परंतु आज से कांवरिया तीर्थयात्रियों की चहल-पहल बढ़ जाने से इसकी सौ साल पुरानी रौनक लौट आई है। चारो तरफ शिव भक्त कांवरियों का जत्था नजर आ रहा है। जिधर देखो उधर ही शिव नाम संकीर्तन जारी है। शिव नगरिया मे जाने वाले कारवां में शामिल बूढ़े भी हैं, जवान भी, किशोर भी व अधेड़ भी।

बाबा गरीबनाथ पर जलाभिषेक करने जाने वाले भक्तों के लिए सोनपुर अनुमंडल प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था की है। सड़कों पर सुरक्षा के लिए जगह-जगह दण्डाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस की प्रतिनियुक्ति की गई है।
पहलेजा घाट धाम से कांवर में जल भरकर कांवरिया भक्तों का हुजूम बाबा नगरिया दूर है जाना जरूर है के गगनभेदी नारों के साथ बाबा हरिहरनाथ का दर्शन करने पहुंच रहा है। यहां से काँवरिया बाबा गरीबनाथ मुजफ्फरपुर के लिए सुबह में रवाना होगा।
निश्चित रुप से राज्य के लिए यह गौरव की बात है कि प्रतिवर्ष लाखों कांवरिया पहलेजा घाट पर आकर स्नान -पूजन व कांवर में जल उठाकर मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करते हैं। बावजूद इसके बिहार सरकार द्वारा इस यात्रा को राजकीय संरक्षण नहीं देना दुखद है। सारी व्यवस्थाएं परंपरा निर्वाह तक सीमित होकर रह गई हैं।
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