
एस.पी.सक्सेना/पटना(बिहार)। नाटय मंडली लोक पंच द्वारा मकरसंक्रांति (Makarsankranti) के अवसर पर 14 जनवरी की संध्या बिहार (Bihar) की राजधानी पटना के कालिदास रंगालय में नाटय शिक्षक की बहाली नाटक का आयोजन किया गया। प्रस्तुत नाटक के माध्यम से बिहार सरकार को यह बताने की कोशिश किया गया कि बिहार में नाटय शिक्षक की बहाली हो और बरसों से चलता आ रहा भारत सरकार का इंडिविजुअल ग्रांट पुनः चालू किया जाए।
उक्त जानकारी देते हुए कहानी के सूत्रधार मनीष महिवाल ने बताया कि प्रस्तुत नाटक नाट्य शिक्षक की बहाली हो में रंगकर्मियों के व्यक्तिगत जीवन के संघर्ष की अलग अलग कहानीयों को दिखाया गया है। जिसमें एक रंगकर्मी के जीवन के उस पहलू को उकेरा गया है जहाँ वो पढ़ाई के बाद भी अपने परिवार और समाज में उपेक्षित है। उन्हें स्कूल, कॉलेज में एक अदद नाट्य शिक्षक की नौकरी भी नहीं मिल सकती। क्योंकि हमारे यहां नाटक के शिक्षकों की बहाली का कोई नियम नहीं है। इस मुखर सवाल पर आकार नाटक दर्शकों के लिए रंगकर्मियों के जीवन संघर्ष से जुड़ा निम्न सवाल भी छोड़ जाता है।
महिवाल ने बताया कि प्रस्तुत नाटक में बताया गया है कि नाटक खत्म होने के बाद दर्शक तालियां बजाते हैं। स्मृति चिन्ह देकर व ताली बजाकर दर्शक उन्हें सम्मानित करते हैं। यही रंगकर्मी जब अपने घर पहुंचते हैं तो घर में इन से बेहूदा किस्म के प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्न पूछा जाता है कि क्या कर रहे हो? नाटक करने से क्या होगा? लोग तुम्हें लौंडा कहते हैं। नाचने वाला कहते हैं। यह सब करने से रोजी-रोटी नहीं चलेगा। कोई अच्छी घर की लड़की का हाथ तक नहीं मिलेगा।
इस तरह के अनगिनत ताने सुनने पड़ते हैं फिर भी रंगकर्मी यह सब सहने के बावजूद रंगकर्म करते रहते हैं। नाटक के माध्यम से रंगकर्मी सरकार से मांग करते हैं की स्कूल और कालेजों में नाट्य शिक्षक की बहाली हो। सरकार रंगकर्मियों को नौकरी दे। उन्हें रोजगार दे तभी वे भी खुलकर समाज का साथ दे सकते हैं। प्रस्तुत नाटक का सूत्रधार मनीष महिवाल
ने बताया कि नाटक में कलाकार विजय पांडेय, दीपा दीक्षित, आकाश उपाध्याय, उर्मिला कुमारी, रजनीश पांडेय, कृष्णा देव, नेहा डोयेल, विकास कुमार, राम प्रवेश, अभिषेक राज, अमित सिंह एमी आदि ने अपने अभिनय से उपस्थित श्रोताओं को भाव विह्वल कर दिया।
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