बर्बादी के कागार पर किसान-ब्रहमदेव प्रसाद सिंह
एस.पी.सक्सेना/समस्तीपुर(बिहार)। अगर आपको 2 रुपए किलो फूलगोभी, 3 रू० किलो बंधा गोभी, 5 रू० भाटा बैगन, 15 रू० कच्चा केला, 15 रू० धनिया पत्ता, 8 रू० सीम, 12 रु० टमाटर, 10 रू० सग्गा प्याज, 22 रू० चुकंदर, 12 रू० आलू, 30 रू० प्याज, 40 रू० हरा मिर्च, 25 रू० किलो गाजर, 5 रू० प्रति पीस कद्दू लेना हो तो समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर प्रखंड के एनएच किनारे स्थित चर्चित मोतीपुर सब्जी मंडी आ जायें।
मंडी में तहकीकात के बाद उक्त जानकारी देते हुए भाकपा माले ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (Tajpur block secretary Surendra prasad singh) ने 12 जनवरी को उक्त जानकारी देते हुए कहा कि मकर संक्रांति के पूर्व इतनी सस्ती सब्जी की बिक्री समझ से परे है। उन्होंने जिले के करीब सभी मंडियों से सस्ती सब्जी मोतीपुर मंडी में उपलब्ध होने की बात कही।
किसान महासभा के नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि क्षेत्र के किसानों को डेढ़ रू० गोभी का पौधा खरीद कर रोपने, निकौनी करने, सिचाई करने, खाद- खल्ली देने, मजदूर से कटवाकर, ठेला भाड़ा देकर मंडी पहुंचाने के बाबजूद 2 से 3 रू० किलो गोभी बेचना पड़ता है। फायदा तो छोड़िये किसान को घर से मजदुरी- भाड़ा देना पड़ रहा है। ऐसे ही हालात अन्य सभी सब्जियों का है। यह किसान की बर्बादी की दास्तान है।
क्षेत्र की चर्चित महिला नेत्री बंदना सिंह ने सस्ती सब्जी के ऐसी हालत का कारण बताते हुए कहा कि नोटबंदी, कोरोना आदि के कारण आमजनों में क्रय शक्ति का आभाव है। ऐसे में सरकार द्वारा किसानों को केसीसी लोन माफी, फसल क्षति मुआवजा, नि: शुल्क बिजली, पानी, खाद, बीज, कृषि संयत्र देकर अगली फसल के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
स्थानीय गद्दीदार सह आधारपुर निवासी कमलेश कुमार बताते हैं कि यह मंडी सैकड़ों एकड़ खेतों के बीच में अवस्थित है। किसान द्वारा सीधे सब्जी काटकर मंडी में लाया जाता है। फलतः स्थल किराये की होती है। कम कीमत रहने पर भी किसान को कुछ पैसे आ ही जाते हैं।
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