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दिन में सपना देखना बंद कर भाजपा आदिवासी समाज के सवालों का जवाब दे-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। भाजपा के वर्ष 2029 में झारखंड फतह के दावे मुंगेरीलाल के हसीन सपने के समान हैं। दिन में सपना देखना बंद करे भाजपा, पहले आदिवासी समाज के सवालों का जवाब दे। बिरसा मुंडा की धरती पर सिर्फ प्रतिमा पर माल्यार्पण और गांव में भोजन करने से आदिवासी समाज का विश्वास नहीं जीता जा सकता। भाजपा अपने आदिवासी विरोधी रवैये पर श्वेतपत्र जारी करे।

भाजपा के झारखंड प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल द्वारा वर्ष 2029 में झारखंड में भाजपा की सरकार बनने का दावा किए जाने तथा संगठन को मजबूत करने के लिए आदिवासी समाज के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की बात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 6 अक्टूबर को उक्त बाते कही।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि भाजपा पहले झारखंड के आदिवासी समाज के सवालों का जवाब दे, उसके बाद वर्ष 2029 में सत्ता हासिल करने का सपना देखे। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर, उनके गांव जाकर श्रद्धांजलि देकर और आदिवासी परिवारों के घर भोजन कर यदि यह समझते हैं कि इससे आदिवासी समाज का विश्वास हासिल हो जाएगा, तो यह उनकी बड़ी राजनीतिक भूल है। आदिवासी समाज केवल दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन, संविधान प्रदत्त अधिकार, सम्मान, रोजगार और सामाजिक न्याय के सवालों पर भाजपा का वास्तविक रुख देखता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व को बताना चाहिए कि झारखंड की आदिवासी अस्मिता और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार का क्या रुख रहा है। सीएनटी-एसपीटी कानून, वनाधिकार कानून, पांचवीं अनुसूची, ग्रामसभा के अधिकार, सरना धर्म कोड, आदिवासी आरक्षण और आदिवासी जमीन की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सवालों पर भाजपा की नीति क्या है?

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों का चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे झारखंड की आत्मा, संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उनके नाम पर राजनीति करने से पहले उनके विचारों यथा अबुआ दिशुम, अबुआ राज और शोषण के खिलाफ संघर्ष को समझना होगा। उन्होंने भाजपा के वर्ष 2029 के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झारखंड की जनता किसी राजनीतिक दल की रणनीतिक बैठक या नेताओं के गांव-गांव दौरे से अपना फैसला नहीं करती। वे अपने अनुभव, सरकारों के कामकाज और अपने अधिकारों की रक्षा के आधार पर मतदान करते है।

नायक ने कहा कि भाजपा यदि वास्तव में आदिवासी समाज के बीच अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है, तो उसे आदिवासी युवाओं के रोजगार, विस्थापन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वनाधिकार पट्टा, आदिवासी जमीन की सुरक्षा और पलायन जैसे गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्ययोजना सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। कहा कि झारखंड के रहिवासियों को राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और विकास की ठोस गारंटी चाहिए।

नायक ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि 2029 की चिंता बाद में करे, पहले वर्ष 2026 में झारखंड के आदिवासी समाज के बीच जाकर उनके सवालों का सामना करें। तभी पता चलेगा कि भाजपा की जमीन कितनी मजबूत है और उसके दावे कितने सच्चे हैं।

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