सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में नोवामुंडी स्थित टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल में 5 अक्तूबर को शिक्षा मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशानुसार आयोजित मिशन लाईफ ई-कचरा जागरूकता एवं संग्रहण अभियान का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या शशिकला ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल युग में ई-कचरा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। हमारे छोटे-छोटे प्रयास, जैसे खराब पड़े उपकरणों का सही निस्तारण, पृथ्वी को दूषित होने से बचाता है। कहा कि मिशन लाईफ के अंतर्गत शुरू यह अभियान विद्यार्थियों में व्यावहारिकता का विकास करेगा और छात्र अपने आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर इसे निरंतर सफल बनाएँगे।
ज्ञात हो कि पर्यावरण संरक्षण को समर्पित यह अभियान दो प्रमुख चरणों में संचालित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्थानीय समुदाय को ई-कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और इसके सुरक्षित पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। विद्यालय परिसर में ई-कचरा संग्रहण कॉर्नर स्थापित किया गया, जहाँ पुराने मोबाइल फोन, केबल, चार्जर, कैलकुलेटर और की-बोर्ड जैसे अनुपयोगी उपकरणों को एकत्र किया गया। इस दौरान कार्यशालाओं और वेबिनार के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कचरे के सही निस्तारण की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर अंतर-सदन स्तर पर पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन और ई-कचरा आर्ट जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अभिभावकों के सहयोग से घरों में पड़े बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामानों को विद्यालय के संग्रह केंद्र में जमा किया। पूरा अभियान विद्यालय के ईको क्लब के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। अभियान के दौरान आयोजित सभी कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और एकत्रित ई-कचरे के आंकड़ों को भारत सरकार के आधिकारिक मिशन लाईफ पोर्टल पर दर्ज किया गया है।
धन्यवाद ज्ञापन कंप्यूटर शिक्षक बृजेश पांडेय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं शांति पाठ के साथ किया गया।
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